जयपुर न्यू सांगानेर रोड पर 25 करोड़ का यू-टर्न, 62 करोड़ खर्च के बाद सड़क फिर खोदने पर सवाल
जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर जेडीए के नए यू-टर्न प्रोजेक्ट को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जेडीए इस सड़क पर यू-टर्न निर्माण पर करीब 25 करोड़ रुपए खर्च करने जा रहा है। खास बात यह है कि पिछले चार वर्षों में इसी सड़क के नवीनीकरण और विकास पर करीब 62 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इनमें सड़क नवीनीकरण, सर्विस रोड, बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने, सड़क चौड़ीकरण और विद्युत व उद्यान कार्य शामिल हैं। अब यू-टर्न निर्माण के लिए सड़क और ग्रीन बेल्ट के हिस्से में बदलाव की तैयारी है। इससे जेडीए की योजना और विभागीय समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
न्यू सांगानेर रोड पर शुरू हुआ यू-टर्न का काम
न्यू सांगानेर रोड पर जयपुर चौपाटी के सामने बी-टू बाईपास रोड पर यू-टर्न निर्माण का काम चल रहा है। इसके आसपास एक और यू-टर्न के लिए तैयारी शुरू होने की जानकारी सामने आई है।प्रस्तावित निर्माण के दायरे में ग्रीन बेल्ट और कुछ पेड़ भी आने की बात कही जा रही है। ऐसे में प्रोजेक्ट को लेकर सड़क उपयोग, ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यावरण से जुड़े सवाल उठ रहे हैं।
चार साल में सड़क पर खर्च हुए 62 करोड़
न्यू सांगानेर रोड के विकास और सुधार पर पिछले चार वर्षों में करीब 62 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का दावा किया गया है।उपलब्ध विवरण के अनुसार 2022 में सड़क नवीनीकरण पर 12 करोड़ रुपए, 2024 में सर्विस रोड निर्माण पर 10 करोड़ रुपए और 2025 में बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने पर 12 करोड़ रुपए खर्च हुए।इसके अलावा 2026 में सड़क चौड़ीकरण पर 13 करोड़ और विद्युत व उद्यान कार्यों पर 15 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
अब यू-टर्न पर 25 करोड़ रुपए का प्रस्ताव
सड़क पर पहले ही करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद अब करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से यू-टर्न निर्माण किया जा रहा है।इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि सड़क विकास की पिछली योजनाओं में यू-टर्न की जरूरत को शामिल क्यों नहीं किया गया। यदि नई ट्रैफिक व्यवस्था के लिए सड़क में बदलाव जरूरी था तो इसे पहले की योजनाओं के साथ क्यों नहीं जोड़ा गया, इस पर भी चर्चा है।
ट्रैफिक सर्वे को लेकर उठ रहे सवाल
प्रस्तावित यू-टर्न को लेकर जेडीए के सामने विस्तृत ट्रैफिक सर्वे उपलब्ध होने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यू-टर्न की जरूरत किस ट्रैफिक आंकड़े के आधार पर तय की गई।इसके अलावा इसकी डिजाइन और स्थान का चयन किन तकनीकी मानकों के आधार पर किया गया, यह भी स्पष्ट होना बाकी है। ट्रैफिक सर्वे और तकनीकी अध्ययन के आधार पर ही ऐसे बदलावों की उपयोगिता का आकलन किया जा सकता है।
हरे कृष्णा मार्ग के प्रयोग का भी जिक्र
यू-टर्न को लेकर हरे कृष्णा मार्ग के प्रयोग का भी उदाहरण सामने आ रहा है। वहां यू-टर्न शुरू होने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर व्यावहारिक दिक्कतें सामने आई थीं।बताया गया कि कंटेनर फंसने जैसी स्थिति के बाद जेडीए ने पुलिस को पत्र लिखकर यू-टर्न पर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने और पुलिसकर्मी तैनात करने का आग्रह किया था।अब न्यू सांगानेर रोड पर नए यू-टर्न को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि पिछले अनुभवों से कितना सबक लिया गया है।
ग्रीन बेल्ट और पेड़ों पर भी असर का सवाल
जयपुर चौपाटी के सामने प्रस्तावित यू-टर्न के आसपास ग्रीन बेल्ट प्रभावित होने की बात सामने आई है। निर्माण के रास्ते में आने वाले पेड़ों को हटाने की कार्रवाई किए जाने की भी जानकारी है।शहर में ट्रैफिक सुधार के लिए सड़क संरचना में बदलाव जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके साथ हरित क्षेत्र और पेड़ों के संरक्षण को लेकर भी सवाल उठते हैं।
महल रोड के बाद फिर ग्रीन बेल्ट पर सवाल
जेडीए के सड़क विकास कार्यों में ग्रीन बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। महल रोड पर कई स्थानों पर ग्रीन बेल्ट के हिस्से को सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी।अब न्यू सांगानेर रोड पर भी इसी तरह की स्थिति बनने से ट्रैफिक समाधान और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सड़क निर्माण और ट्रैफिक प्लानिंग में समन्वय जरूरी
एक ही सड़क पर अलग-अलग समय में सड़क नवीनीकरण, सर्विस रोड, बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने, चौड़ीकरण और अब यू-टर्न जैसे काम होने से विभागीय समन्वय पर सवाल उठना स्वाभाविक है।शहरी सड़कों की योजना बनाते समय भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों का आकलन पहले से करना जरूरी माना जाता है। इससे बार-बार सड़क तोड़ने और सार्वजनिक धन खर्च होने की स्थिति को कम किया जा सकता है।
अब प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर नजर
न्यू सांगानेर रोड पर प्रस्तावित यू-टर्न का उद्देश्य ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करना बताया जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता निर्माण पूरा होने और संचालन के बाद ही स्पष्ट होगी।फिलहाल 62 करोड़ रुपए के पिछले खर्च और 25 करोड़ रुपए के नए यू-टर्न प्रोजेक्ट को लेकर जेडीए की योजना पर सवाल उठ रहे हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नया यू-टर्न ट्रैफिक को कितना सुगम बनाता है और निर्माण के लिए सड़क व ग्रीन बेल्ट में किए जाने वाले बदलाव का कितना असर पड़ता है।