विश्व पर्यटन दिवस: तारागढ़ पर रोपवे बना तो बदलेगा अजमेर का पर्यटन नक्शा, 870 मीटर ऊंचाई से दिखेगा शहर
अजमेर के ऐतिहासिक तारागढ़ किले को बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए रोपवे प्रोजेक्ट को अहम माना जा रहा है। समुद्र तल से करीब 870 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तारागढ़ तक पहुंचने के लिए अभी घुमावदार पहाड़ी सड़क ही मुख्य रास्ता है। रोपवे बनने के बाद पर्यटकों को सुरक्षित और रोमांचक सफर के साथ अरावली की पहाड़ियों से पूरे अजमेर का विहंगम नजारा देखने का अवसर मिल सकता है। परियोजना के साथ टेंट हाउस, कैफे, रेस्टोरेंट और व्यू प्वाइंट जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना भी सामने आई है।
11वीं शताब्दी में बना था तारागढ़ किला
अजमेर का तारागढ़ किला चौहानकालीन इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। 11वीं शताब्दी में अरावली की पहाड़ी पर बने इस किले को स्थानीय स्तर पर गढ़बीठली के नाम से भी जाना जाता है।समुद्र तल से करीब 870 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तारागढ़ अजमेर के प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है। पहाड़ी की ऊंचाई से शहर का विस्तृत नजारा दिखाई देता है।
अभी घुमावदार सड़क से पहुंचते हैं पर्यटक
फिलहाल तारागढ़ किले तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को सड़क मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है। डिग्गी बाजार की ओर से निजी वाहनों और टैक्सियों के जरिए पहाड़ी तक पहुंचा जाता है।घुमावदार और संकरी पहाड़ी सड़क के कारण वाहन चलाने में सावधानी की जरूरत होती है। अधिक यात्रियों के साथ सफर करने पर सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।रोपवे बनने के बाद इस सफर को पर्यटन अनुभव के लिहाज से भी नया रूप मिलने की उम्मीद है।
रोपवे से अरावली और अजमेर का दिखेगा नजारा
प्रस्तावित रोपवे की सबसे बड़ी खासियत इसका ऊंचाई वाला सफर होगा। रोपवे के जरिए पर्यटक अरावली की पहाड़ियों के ऊपर से तारागढ़ की ओर पहुंच सकेंगे।ऊंचाई से अजमेर शहर का विस्तृत दृश्य दिखाई दे सकता है। इसके अलावा पहाड़ियों, हरियाली और ऐतिहासिक किले का दृश्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।इससे तारागढ़ को सिर्फ ऐतिहासिक स्थल के बजाय एडवेंचर और नेचर टूरिज्म से भी जोड़ने का अवसर मिलेगा।
2026-27 के बजट में 20 करोड़ रुपए मंजूर
तारागढ़ रोपवे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए 2026-27 के बजट में 20 करोड़ रुपए मंजूर किए जाने की जानकारी सामने आई है।इस परियोजना के पूरा होने पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।हालांकि, प्रोजेक्ट की पूरी लागत, निर्माण की समयसीमा और अंतिम संचालन मॉडल की तस्वीर आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट होगी।
पहले भी रोपवे के लिए हुई थी कोशिश
तारागढ़ तक रोपवे बनाने की कोशिश पहले भी की जा चुकी है। करीब सात-आठ साल पहले एक निजी कंपनी ने दरगाह-नागफणी क्षेत्र और आसपास के इलाकों का सर्वे किया था।रोपवे के लिए नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग से आवश्यक अनुमति और एनओसी को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई थी। पुष्कर के सावित्री माता मंदिर में रोपवे निर्माण से जुड़ी कंपनी की ओर से डीपीआर तैयार किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।हालांकि, परियोजना को उस समय अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी।
PPP मॉडल पर संचालन की भी योजना
पहले तैयार किए गए प्रस्ताव में तारागढ़ रोपवे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर संचालित करने की चर्चा हुई थी।रोपवे के लिए वन भूमि पर पिलर लगाने की योजना भी प्रस्तावित की गई थी। इसके लिए संबंधित विभागों की अनुमति जरूरी होगी।अब बजट में राशि मंजूर होने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
रोपवे के साथ विकसित हो सकती हैं पर्यटन सुविधाएं
रोपवे प्रोजेक्ट के साथ तारागढ़ क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की भी संभावनाएं हैं। प्रस्तावित सुविधाओं में टेंट हाउस, कैफे और रेस्टोरेंट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं।इसके अलावा व्यू प्वाइंट, गार्डन और अन्य मनोरंजन सुविधाएं विकसित करने की संभावना भी जताई गई है। इससे पर्यटकों के लिए तारागढ़ में ज्यादा समय बिताने का अवसर बन सकता है।
रेलवे से जुड़ी सुविधाओं का भी प्रस्ताव
प्रस्तावित विकास योजना में रेलवे से जुड़ी कुछ सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है। इनमें रेलवे कैफेटेरिया, होटल या रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।इसके अलावा रेलवे म्यूजियम और सर्किट हाउस जैसे प्रस्तावों की भी चर्चा रही है। इन योजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए संबंधित विभागों की मंजूरी और विस्तृत योजना जरूरी होगी।
तारागढ़ की दीवारें करीब 10 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में
तारागढ़ किले का ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व भी इसे खास बनाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार किले की दीवारें करीब 10 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली हैं।किले में आवाजाही के लिए तीन प्रमुख प्रवेश द्वार बताए जाते हैं। वहीं 1832 में नसीराबाद के सैनिकों के लिए यहां सेनेटोरियम बनाए जाने की जानकारी भी मिलती है।1983-84 में पहाड़ी को काटकर यहां सड़क तैयार की गई थी।
रोपवे से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बढ़ावा
तारागढ़ में रोपवे बनने से पर्यटकों की पहुंच आसान होने के साथ स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, गाइड और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को इसका लाभ मिल सकता है।यदि रोपवे के साथ प्रस्तावित पर्यटन सुविधाएं भी विकसित होती हैं तो तारागढ़ को अजमेर के प्रमुख पर्यटन सर्किट से और मजबूती से जोड़ा जा सकता है।विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर तारागढ़ रोपवे की योजना अजमेर के पर्यटन विकास की संभावनाओं को फिर चर्चा में ले आई है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि वर्षों से प्रस्तावित यह परियोजना कब धरातल पर उतरती है।