राजगढ़ में भगवान जगन्नाथ-जानकी का दिव्य विवाह, 11 फीट की वरमालाओं के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब
अलवर के राजगढ़ स्थित ऐतिहासिक गंगाबाग मेले में भगवान जगन्नाथ और माता जानकी का पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न हुआ। भव्य वरमाला, कन्यादान और पाणिग्रहण संस्कार के दौरान हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक आयोजन के साक्षी बने। विवाह के बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल स्नेह भोज का आयोजन किया गया, जबकि पूरे मेला परिसर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ पाणिग्रहण संस्कार
जगन्नाथ मेले के चौथे दिन चौपड़ बाजार स्थित जगदीश मंदिर से माता जानकी की भव्य शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ गंगाबाग पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। मंदिर के महंत पूरण दास और पंडित मदन मोहन शास्त्री की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान जगन्नाथ और माता जानकी का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। विवाह समारोह के दौरान पूरा परिसर जयघोष और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
दिल्ली और जयपुर से मंगवाई गईं 11-11 फीट की विशेष वरमालाएं
विवाह समारोह को भव्य बनाने के लिए दिल्ली और जयपुर से मोगरे तथा चांदी के फूलों से तैयार 11-11 फीट लंबी विशेष वरमालाएं मंगवाई गई थीं। भगवान जगन्नाथ और माता जानकी की मनमोहक झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता जानकी का प्रतीकात्मक कन्यादान किया। वहीं, एडवोकेट विश्वास मित्तल की ओर से सजाई गई फूल बंगला झांकी भी श्रद्धा का प्रमुख आकर्षण बनी रही।
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बारात का स्वागत, भंडारे में उमड़े श्रद्धालु
विवाह से पहले भगवान जगन्नाथ की बारात का स्वागत वधु पक्ष की ओर से महंत प्रकाश दास ने किया। महंत पूरण दास के नेतृत्व में निकली बारात के स्वागत के बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। सुबह से ही महिलाएं भगवान जगन्नाथ की परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करती नजर आईं।
मेले में झूले, खरीदारी और धार्मिक उत्साह का संगम
राजगढ़ सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचे। महिलाओं ने श्रृंगार और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी की, जबकि बच्चों और युवाओं ने विभिन्न झूलों और मनोरंजन के साधनों का आनंद लिया। धार्मिक आयोजन के साथ मेले में सामाजिक और सांस्कृतिक उत्साह भी देखने को मिला, जिससे पूरे क्षेत्र में पर्व जैसा वातावरण बना रहा।
बारिश से कीचड़ बढ़ा, फिर भी नहीं टूटा श्रद्धालुओं का उत्साह
मेले के दौरान हुई बारिश के कारण गंगाबाग के मुख्य मार्ग पर कीचड़ और फिसलन की स्थिति बन गई। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को आवाजाही में कठिनाई का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई और बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे। आयोजकों ने बताया कि 21 और 22 जुलाई को भराभर मेले का आयोजन होगा, जबकि 23 जुलाई को भगवान जगन्नाथ माता जानकी के साथ मुख्य मंदिर लौटेंगे।