जौहर यूनिवर्सिटी पर डिमोलिशन नोटिस, तजीन फातिमा बोलीं- मिला 15 दिन का समय
रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद जौहर यूनिवर्सिटी का मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर जारी किए गए गिराने के नोटिस पर सपा नेता आजम खान की पत्नी डॉ. तजीन फातिमा ने कहा कि उन्हें 15 दिन का समय मिला है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब कानूनी सलाह के बाद आगे की रणनीति तय करेगा।
अनधिकृत निर्माण के आरोप में जारी हुआ नोटिस
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने परिसर में बने कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर डिमोलिशन नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का आरोप है कि कुछ निर्माण कार्य जरूरी अनुमति और स्वीकृत नक्शों के बिना किए गए हैं। नोटिस जारी होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर और स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
तजीन फातिमा ने कहा- कानूनी टीम करेगी अध्ययन
सपा नेता मोहम्मद आजम खान की पत्नी डॉ. तजीन फातिमा ने नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कानूनी विशेषज्ञ पूरे मामले का अध्ययन करेंगे और इसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उनका कहना है कि नोटिस मिलने के बाद सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
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छात्रों के लिए लगाया गया काउंसलिंग कैंप
जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई के आदेश के बाद प्रशासन ने वहां पढ़ने वाले छात्रों की सुविधा के लिए काउंसलिंग कैंप लगाने की बात कही है। जिला प्रशासन के अनुसार, छात्रों को दूसरे शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और आगे की पढ़ाई को लेकर मार्गदर्शन दिया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य छात्रों के भविष्य को प्रभावित होने से बचाना बताया जा रहा है।
यूनिवर्सिटी से गुजरने वाली सड़क को लेकर भी विवाद
जौहर यूनिवर्सिटी से होकर गुजरने वाली करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क को लेकर भी प्रशासन ने कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग ने सड़क को आम जनता के आवागमन के लिए सार्वजनिक मार्ग बताते हुए साइन बोर्ड लगाया है। बताया जा रहा है कि इस सड़क का निर्माण वर्ष 2016-17 में तत्कालीन राज्य सरकार के कार्यकाल में पीडब्ल्यूडी द्वारा कराया गया था।
क्या है पूरा मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण और विश्वविद्यालय अधिकारियों के बीच हुई सुनवाई के बाद जिला प्रशासन ने कथित अवैध निर्माण को हटाने का आदेश जारी किया था। प्रशासन का कहना है कि जिन भवनों पर कार्रवाई प्रस्तावित है, उनके निर्माण में नियमों का पालन नहीं किया गया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत की जानी है। वहीं, विश्वविद्यालय पक्ष का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखेगा।