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होर्मुज की ‘चाबी’ क्यों माना जाता है ग्रेटर टुनब? जानिए ईरान के इस रणनीतिक द्वीप का महत्व

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ग्रेटर टुनब द्वीप एक बार फिर चर्चा में है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित इस छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण द्वीप को ईरान की समुद्री सुरक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञ इसकी तुलना भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से करते हैं, क्योंकि यह क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, अमेरिका द्वारा इस द्वीप पर 90 मिनट तक हमला किए जाने जैसे दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऐसे दावों को सत्यापित जानकारी के साथ ही देखा जाना चाहिए।

ग्रेटर टुनब क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

ग्रेटर टुनब द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस समुद्री मार्ग से गुजरता है। इस रणनीतिक स्थिति के कारण यह द्वीप समुद्री निगरानी, नौसैनिक गतिविधियों और रक्षा संचालन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र पर प्रभाव रखने वाला देश होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रख सकता है।

‘ईरान का अंडमान-निकोबार’ क्यों कहा जाता है?

रक्षा विश्लेषक ग्रेटर टुनब की तुलना भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से करते हैं। जिस तरह अंडमान-निकोबार हिंद महासागर और मलक्का जलडमरूमध्य पर भारत को रणनीतिक बढ़त देता है, उसी तरह ग्रेटर टुनब ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य और समुद्री निगरानी की क्षमता प्रदान करता है। इसी वजह से इसे “कभी न डूबने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर” जैसी उपमा भी दी जाती है।

UAE के साथ पुराना क्षेत्रीय विवाद

ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा तीन ऐसे द्वीप हैं, जिन पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अपना दावा करता है। वर्ष 1971 से इन द्वीपों पर ईरान का नियंत्रण है, जबकि UAE लगातार इन्हें अपना क्षेत्र बताता रहा है। यह विवाद दशकों से दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है और समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आता रहा है।

ईरान की सैन्य मौजूदगी का अहम केंद्र

रिपोर्टों के अनुसार, ग्रेटर टुनब द्वीप पर ईरान ने नौसैनिक ठिकाने, सैन्य चौकियां, निगरानी प्रणाली और अन्य रक्षा सुविधाएं विकसित की हैं। माना जाता है कि यहां से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखी जाती है। इस वजह से यह द्वीप ईरान की समुद्री सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। इस कारण यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि अमेरिका सहित कई देशों की इस क्षेत्र पर लगातार नजर रहती है।

भारत के अंडमान-निकोबार की रणनीतिक भूमिका

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत की समुद्री सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। ये द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के करीब स्थित हैं, जहां से एशिया का बड़ा समुद्री व्यापार गुजरता है। यहां भारत की त्रि-सेवा (थल, जल और वायु सेना) कमान मौजूद है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

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