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पाकिस्तान में गहराया आटे का संकट, इस्लामाबाद-रावलपिंडी में बढ़ीं कीमतें; गेहूं आपूर्ति पर बढ़ी चिंता

पाकिस्तान में एक बार फिर आटा और गेहूं की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी समेत कई क्षेत्रों में आटे की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आटा मिल संचालकों का कहना है कि यदि गेहूं की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इस बीच, गेहूं की आवाजाही और आपूर्ति को लेकर भी नई चुनौतियां सामने आई हैं।

आटे की कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ी परेशानी

इस्लामाबाद और रावलपिंडी में 20 किलोग्राम आटे की बोरी की कीमत बढ़कर करीब 2,500 से 2,600 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई है। खुदरा बाजार में भी आटा पहले की तुलना में महंगा बिक रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि से आम उपभोक्ताओं का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।

आटा मिलों ने जताई उत्पादन प्रभावित होने की आशंका

इस्लामाबाद आटा मिल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि गेहूं की नियमित आपूर्ति जल्द बहाल नहीं होती है तो कई मिलों का संचालन प्रभावित हो सकता है। मिल संचालकों का कहना है कि कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सामान्य करने की मांग की है।

गेहूं आपूर्ति पर बढ़ी चिंता

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से गेहूं की आपूर्ति को लेकर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं, जिससे अन्य क्षेत्रों में उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। पंजाब देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्र है और कई शहर इसकी आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने से खाद्यान्न संकट गहरा सकता है।

महंगाई का असर ब्रेड उद्योग पर भी

रावलपिंडी के बेकरी और ब्रेड कारोबार से जुड़े संगठनों ने भी उत्पादन लागत बढ़ने की बात कही है। उनका कहना है कि परिवहन, बिजली और ईंधन की लागत बढ़ने से ब्रेड बनाना महंगा हो गया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से कीमतों की समीक्षा करने की मांग की है ताकि बढ़ी हुई लागत का संतुलन बनाया जा सके।

जमाखोरी और सप्लाई चेन पर उठे सवाल

व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर जमाखोरी और सीमित आपूर्ति के कारण बाजार में आटे की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

खाद्य सुरक्षा और महंगाई पर नियंत्रण पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, सप्लाई चेन मजबूत करने और जमाखोरी पर प्रभावी कार्रवाई से स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।

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