खामेनेई का बड़ा ऐलान: यूरेनियम पर नहीं झुकेगा ईरान, शांति वार्ता पर मंडराया संकट
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल को बड़ा संदेश दे दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई ने साफ कर दिया कि देश अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी भी हालत में बाहर नहीं भेजेगा। इस बयान के बाद अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पर नए संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह फैसला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है।
यूरेनियम मुद्दे पर ईरान का सख्त रुख
ईरान ने एक बार फिर अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई ने निर्देश दिया है कि देश में मौजूद संवर्धित यूरेनियम का भंडार ईरान में ही रखा जाएगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार ईरान पर परमाणु गतिविधियों को सीमित करने का दबाव बना रहे हैं। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन पश्चिमी देशों को आशंका है कि यह कार्यक्रम भविष्य में परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में इस्तेमाल हो सकता है।
शांति वार्ता पर बढ़ा तनाव
ईरान के इस फैसले ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रही बातचीत को मुश्किल बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, वॉशिंगटन चाहता था कि किसी भी संभावित समझौते के तहत ईरान अपने अधिकतर संवर्धित यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजे। अमेरिका का मानना है कि इससे क्षेत्र में परमाणु खतरे को कम किया जा सकता है। हालांकि तेहरान ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं तो शांति समझौते की संभावना कमजोर पड़ सकती है और तनाव लंबे समय तक जारी रह सकता है।
इजरायल की चिंता बढ़ी
इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कई बार कहा है कि ईरान का बढ़ता परमाणु भंडार पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। इजरायल की मांग है कि ईरान न सिर्फ संवर्धित यूरेनियम को हटाए बल्कि अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और प्रॉक्सी संगठनों को समर्थन देना भी बंद करे। इजरायल का मानना है कि बिना इन शर्तों के क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है। ईरान के नए रुख ने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
60 फीसदी यूरेनियम संवर्धन पर दुनिया की नजर
पश्चिमी देशों की सबसे बड़ी चिंता ईरान द्वारा 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन को लेकर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तर सामान्य नागरिक उपयोग से कहीं अधिक माना जाता है और इसे परमाणु हथियार क्षमता के करीब समझा जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों ने इसे लेकर कई बार चेतावनी भी दी है। हालांकि ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता आया है। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस दावे पर पूरी तरह भरोसा करने को तैयार नहीं दिख रहा।
मध्य पूर्व में बढ़ सकती है अस्थिरता
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते टकराव का असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्ता विफल होती है तो क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है। पहले से ही कई देशों में अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में परमाणु मुद्दे पर टकराव वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी असर डाल सकता है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।