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लखनऊ अग्निकांड: बारात की खुशियां राख में तब्दील, 200 से ज्यादा झोपड़ियां जलकर खाक

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर इलाके में लगी भीषण आग ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी। करीब 200 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं, वहीं एक घर की शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। सिलेंडर धमाकों ने हालात और भयावह कर दिए। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज करते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

आग ने लिया विकराल रूप, बस्ती में मची अफरा-तफरी

बुधवार शाम करीब 5:30 बजे विकास नगर की झुग्गी बस्ती में अचानक आग भड़क उठी, जिसने कुछ ही देर में भयावह रूप ले लिया। तेज हवा और घनी बस्ती के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और देखते ही देखते सैकड़ों झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर-दूर तक दिखाई दे रही थीं। स्थानीय लोगों में भगदड़ मच गई और हर कोई अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागता नजर आया। हालात इतने गंभीर हो गए कि प्रशासन को तत्काल इलाके की बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ी।

शादी का घर बना मातम का केंद्र

इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर उस परिवार की रही, जहां उसी दिन बेटे की बारात निकलनी थी। घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन अचानक उठीं आग की लपटों ने सब कुछ छीन लिया। दूल्हे ने समय रहते अपनी मां को बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। पीड़ित परिवार के मुताबिक, घर में रखे लाखों रुपये के जेवर, नकदी और शादी का सारा सामान जलकर राख हो गया। जिस आंगन से शहनाई गूंजनी थी, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और राख का ढेर बचा है।

सिलेंडर धमाकों से दहला इलाका

आग के दौरान एक के बाद एक करीब 10 गैस सिलेंडर फटने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। धमाकों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और लपटें आसमान छूती नजर आईं। इन विस्फोटों ने आग को और भड़काने का काम किया, जिससे हालात काबू से बाहर हो गए। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के पक्के मकानों को भी खाली कराया गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। यह घटनाक्रम पूरे इलाके के लिए खौफनाक अनुभव बन गया।

प्रशासन का एक्शन और राहत कार्य

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। वहीं, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। घायलों के इलाज के लिए एंबुलेंस तैनात की गईं और दमकल की कई गाड़ियां आग बुझाने में जुटीं। साथ ही घटना की जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

वर्षों की मेहनत पलभर में स्वाहा

इस बस्ती में रहने वाले लोग पिछले दो दशकों से यहां जीवन बिता रहे थे, लेकिन एक ही घटना ने सब कुछ छीन लिया। कई परिवारों के पास अब न रहने को घर बचा है और न ही खाने-पीने का सामान। आग बुझने के बाद लोग राख के ढेर में अपने बचे-खुचे सामान की तलाश करते नजर आए। कई मवेशियों के झुलसने की भी खबर है, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और पीड़ितों के पुनर्वास की तैयारी में जुटा है।

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