ड्रोन विवाद में पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल दोषी, अदालत ने सुनाई 30 साल की सजा
दक्षिण कोरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति यून सुक येओल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सियोल की एक अदालत ने उन्हें और उनके पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को ड्रोन प्रकरण में दोषी मानते हुए 30 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि दोनों ने उत्तर कोरिया के साथ तनाव बढ़ाने और देश में आपात स्थिति जैसे हालात पैदा करने की कोशिश की थी।
अदालत ने किन आरोपों में ठहराया दोषी?
सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यून सुक येओल और पूर्व रक्षा मंत्री ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और ऐसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश कीं, जिनसे उत्तर कोरिया की ओर से जवाबी कार्रवाई हो सकती थी। अदालत के अनुसार, इस कदम से दक्षिण कोरिया की सैन्य क्षमताओं और सुरक्षा हितों को नुकसान पहुंचा तथा क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने का जोखिम पैदा हुआ।
ड्रोन उड़ाने के आरोप से बढ़ा था विवाद
उत्तर कोरिया ने पहले आरोप लगाया था कि दक्षिण कोरिया की ओर से प्योंगयांग के ऊपर ड्रोन भेजे गए और प्रचार सामग्री गिराई गई। उस समय दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों की न तो पुष्टि की थी और न ही खंडन किया था। हालांकि बाद में इस मामले की जांच शुरू हुई और इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से जोड़कर देखा गया।
पहले भी मिल चुकी है सजा
यह पहला मामला नहीं है जिसमें यून सुक येओल को दोषी ठहराया गया हो। इससे पहले दिसंबर 2024 में लागू किए गए अल्पकालिक मार्शल लॉ से जुड़े मामले में भी उन्हें विद्रोह के आरोप में दोषी माना गया था। इसके बाद महाभियोग प्रक्रिया के जरिए उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाया गया और बाद में गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कई आपराधिक मामलों की सुनवाई शुरू हुई।
फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी
यून सुक येओल के वकीलों ने अदालत के फैसले से असहमति जताते हुए ऊपरी अदालत में अपील करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि संबंधित कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से उठाए गए थे और अदालत का फैसला दक्षिण कोरिया के रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकता है। इस मामले ने दक्षिण कोरिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।