रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की सख्ती, भारत पर बढ़ा दबाव
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ सकता है असर
India के लिए कच्चे तेल को लेकर नई चिंता खड़ी होती दिखाई दे रही है। होर्मुज संकट के बीच पहले अमेरिका ने कुछ समय के लिए रूसी तेल खरीद पर राहत दी थी, जिससे भारत को सस्ता क्रूड मिलता रहा। लेकिन अब Donald Trump प्रशासन ने रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
होर्मुज संकट से बढ़ी वैश्विक चिंता
Strait of Hormuz में जारी तनाव के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीमा खर्च बढ़ गया है और सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। जहां पहले कीमतें करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थीं, वहीं अब यह 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं।
भारत के सामने दोहरी चुनौती
भारत अब दोहरी मुश्किल का सामना कर रहा है। एक तरफ मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर रूसी तेल पर फिर से प्रतिबंध का खतरा मंडरा रहा है। रूस से मिलने वाला डिस्काउंटेड ऑयल भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि इससे घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली थी।
भारत के पास क्या विकल्प?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत अब वैकल्पिक तेल स्रोतों की तलाश तेज कर सकता है। इसमें Saudi Arabia, United Arab Emirates और United States से आयात बढ़ाना शामिल हो सकता है। हालांकि महंगे तेल और बढ़ते फ्रेट कॉस्ट का असर अंततः आम लोगों तक पहुंच सकता है। यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो पेट्रोल-डीजल के दामों में और बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।