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भारत में छात्र आंदोलन पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की सुरक्षा पर दिया जोर

दिल्ली में छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) की प्रतिक्रिया सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है और प्रदर्शनकारियों को बिना डर, गिरफ्तारी या उत्पीड़न के अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। इस बीच प्रदर्शन को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र में शिकायत भी दर्ज कराई गई है, जबकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे एक-दूसरे से अलग हैं।

UN ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर दिया जोर

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक से भारत में जारी छात्र आंदोलन को लेकर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र नई दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों की जानकारी रखता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और लोगों को बिना गिरफ्तारी, उत्पीड़न या हिंसा के डर के अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों के अधिकारों की भी रक्षा करें।

मानवाधिकार तंत्र में दर्ज हुई शिकायत

छात्र आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की स्पेशल प्रोसीजर्स शाखा में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में प्रदर्शनकारियों की हिरासत, कथित मानवाधिकार उल्लंघन, बड़ी संख्या में दर्ज एफआईआर और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित भारतीय अधिकारियों की ओर से अलग-अलग समय पर अपना पक्ष भी रखा गया है और मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर बहस जारी है।

मानवाधिकार संगठनों ने भी जताई चिंता

एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त की है। इन संगठनों ने आरोप लगाया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया गया और इंटरनेट सेवाओं व सार्वजनिक परिवहन पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए। वहीं उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे। पुलिस के अनुसार, अधिकारियों पर पथराव किया गया, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और बल प्रयोग बिना किसी उकसावे के किया गया। इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

मामले पर बनी हुई है नजर

छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकारों से जुड़े आरोपों को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में जांच, न्यायिक प्रक्रिया और सरकारी प्रतिक्रिया के आधार पर इस पूरे मामले की दिशा तय होगी। फिलहाल सभी पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और घटनाक्रम पर देश-दुनिया की नजर बनी हुई है।

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