राजस्थान का अनोखा वार्ड: सिर्फ 92 वोटर, 25-30 वोट से बन सकता है पार्षद
राजस्थान निकाय चुनाव के बीच झुंझुनूं जिले की मंड्रेला नगरपालिका का वार्ड नंबर 13 अपने अनोखे चुनावी गणित के कारण चर्चा में है। इस वार्ड की पूरी मतदाता सूची में सिर्फ 92 वोटर दर्ज हैं। तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबले में अगर मतदान 65 से 70 वोट के आसपास रहता है, तो महज 25 से 30 वोट हासिल करने वाला उम्मीदवार भी पार्षद बन सकता है। यही वजह है कि यह वार्ड प्रदेश के सबसे छोटे और दिलचस्प चुनावी मुकाबलों में गिना जा रहा है।
सिर्फ 92 मतदाता, तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला
मंड्रेला नगरपालिका के वार्ड 13 में कुल 92 मतदाता हैं। वार्ड में पार्षद पद के लिए तीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। स्थानीय स्तर पर माना जा रहा है कि मतदाता सूची में शामिल कुछ लोग नौकरी, कारोबार या पढ़ाई के कारण वार्ड से बाहर रहते हैं।
ऐसे में वास्तविक मतदान कुल मतदाताओं की संख्या से कम रहने की संभावना जताई जा रही है। यदि करीब 65 से 70 वोट पड़ते हैं और तीन प्रत्याशियों में मुकाबला बंटता है, तो 25 से 30 वोट पाने वाला उम्मीदवार भी जीत हासिल कर सकता है।
सात मकानों में रहते हैं 64 मतदाता
वार्ड 13 की मतदाता सूची का एक और आंकड़ा इसे खास बनाता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वार्ड के सिर्फ 7 मकानों में 64 मतदाता दर्ज हैं। इनमें एक मकान ऐसा भी है, जहां अकेले 15 मतदाता पंजीकृत हैं।
छोटे मतदाता आधार के कारण प्रत्याशियों का जनसंपर्क भी पारंपरिक बड़े चुनावों से बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। यहां बड़ी रैलियों और सभाओं के बजाय उम्मीदवार घर-घर जाकर व्यक्तिगत रूप से मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।
BJP उम्मीदवार के सामने दो निर्दलीय
वार्ड 13 में बीजेपी ने विनय जोशी को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। वहीं रतनलाल और नितिन शर्मा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।
इस मुकाबले की खास बात यह है कि कांग्रेस ने इस वार्ड से अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। ऐसे में मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी और दो निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच दिखाई दे रहा है। अब चुनाव परिणाम बताएगा कि पार्टी संगठन का समर्थन किसे फायदा पहुंचाता है और निर्दलीय उम्मीदवारों में से कौन बाजी मारता है।
एक ही नगरपालिका में वोटरों की संख्या में बड़ा अंतर
मंड्रेला नगरपालिका के अलग-अलग वार्डों में मतदाताओं की संख्या में काफी अंतर देखने को मिलता है। वार्ड 13 में जहां केवल 92 मतदाता हैं, वहीं वार्ड 6 में करीब 1,000 मतदाता दर्ज हैं। वार्ड 6 में 551 पुरुष और 449 महिला मतदाता बताए गए हैं।
इसके अलावा वार्ड 1 में 283, वार्ड 12 में 269 और वार्ड 25 में 144 मतदाता दर्ज हैं। एक ही नगरपालिका के वार्डों में मतदाता संख्या का यह अंतर स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
बेहद छोटे दायरे में सिमटा है वार्ड 13
वार्ड 13 का भौगोलिक क्षेत्र भी काफी सीमित है। उपलब्ध परिसीमन विवरण के अनुसार इसकी सीमा सांवरिया बाल उद्यान से शुरू होती है और आसपास के कुछ मकानों, श्याम मंदिर, नोहरे, राजकीय विद्यालय, लालकोठी और पंचायत भवन जैसे प्रमुख स्थानों को शामिल करती है।
वार्ड की सीमा विभिन्न मकानों और स्थानीय स्थलों से होकर वापस शुरुआती बिंदु तक पहुंचती है। कम मतदाता और सीमित भौगोलिक क्षेत्र के कारण यहां चुनाव प्रचार का तरीका भी बड़े वार्डों से काफी अलग है।
25-30 वोट पर जीत का बन सकता है गणित
इस वार्ड में चुनावी गणित पूरी तरह मतदान प्रतिशत और वोटों के बंटवारे पर निर्भर करेगा। अगर कुल 65 से 70 वोट पड़ते हैं और तीनों उम्मीदवारों के बीच वोट विभाजित होते हैं, तो 25 से 30 वोट पाने वाला प्रत्याशी जीत सकता है।
हालांकि यह केवल संभावित चुनावी गणित है। वास्तविक जीत कितने वोटों से होगी, यह मतदान के दिन पड़े कुल वोट और तीनों उम्मीदवारों को मिले मतों पर निर्भर करेगा।
छोटे वार्ड ने बढ़ाई चुनावी दिलचस्पी
मंड्रेला का वार्ड 13 इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय निकाय चुनावों में हर वार्ड का चुनावी गणित अलग हो सकता है। जहां बड़े वार्डों में उम्मीदवारों को सैकड़ों या हजारों मतदाताओं तक पहुंचना पड़ता है, वहीं यहां कुछ दर्जन वोट ही परिणाम तय करने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं।
अब सभी की नजर मतदान और परिणाम पर है। देखना दिलचस्प होगा कि 92 मतदाताओं वाले इस छोटे से वार्ड में बीजेपी प्रत्याशी जीत दर्ज करता है या दो निर्दलीय उम्मीदवारों में से कोई बाजी पलट देता है।