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जैसलमेर निकाय चुनाव: हॉट सीटों पर कांटे की टक्कर, रिश्तेदारियां भी दांव पर

जैसलमेर में शहरी सरकार के चुनाव का काउंटडाउन अब अंतिम दौर में पहुंच गया है। मतदान से पहले प्रत्याशियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। कहीं भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है तो कई वार्डों में निर्दलीयों की मौजूदगी ने चुनावी तस्वीर को त्रिकोणीय और बहुकोणीय बना दिया है। खास बात यह है कि कुछ वार्डों में राजनीतिक मुकाबले के साथ रिश्तेदारियां भी दांव पर लगी हैं। वार्ड 34 में चाचा-भतीजा आमने-सामने हैं, जबकि कई हॉट सीटों पर परिणाम को लेकर अभी से कयास लगाना मुश्किल नजर आ रहा है।

घर-घर जनसंपर्क, आखिरी वक्त तक वोटरों को साधने की कोशिश

मतदान से ठीक पहले जैसलमेर के अलग-अलग वार्डों में प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के नेता तथा पार्टी पदाधिकारी भी अपने प्रत्याशियों के साथ प्रचार में जुटे हुए हैं।

कहीं रैलियों के जरिए माहौल बनाया जा रहा है तो कहीं व्यक्तिगत संपर्क पर जोर है। चुनावी मैदान में निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या ने कई वार्डों में मुख्य राजनीतिक दलों की चुनौती बढ़ा दी है।

वार्ड 31 से 33 तक सीधी टक्कर पर नजर

वार्ड 31 में भाजपा के टीकमचंद और कांग्रेस के तरुण कुमार के बीच मुकाबला है। इनके अलावा एक निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

वार्ड 32 को जैसलमेर की प्रमुख हॉट सीटों में माना जा रहा है। यहां भाजपा के विजय डांगरा और कांग्रेस के प्रवीण सुदा आमने-सामने हैं। दोनों प्रत्याशी चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर पूरी ताकत लगा रहे हैं।

वार्ड 33 में भाजपा के मुकेश नागौरी और कांग्रेस के निर्मल पुरोहित के बीच मुकाबला है। दोनों प्रत्याशियों के अपने-अपने जनाधार के कारण इस सीट के नतीजे को लेकर अभी स्पष्ट तस्वीर नहीं बन पा रही है।

वार्ड 34 में चाचा-भतीजे की चुनावी भिड़ंत

जैसलमेर के वार्ड 34 का चुनाव रिश्तों के लिहाज से खास बन गया है। यहां भाजपा के महेश शर्मा और कांग्रेस के शुभम शर्मा आमने-सामने हैं। दोनों के बीच चाचा-भतीजे का रिश्ता बताया जा रहा है।

इस रिश्तेदारी के बीच दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में इस वार्ड का परिणाम राजनीतिक समीकरणों के साथ पारिवारिक रिश्तों के लिहाज से भी चर्चा में रहेगा।

महिला आरक्षित वार्ड 35 में पांच उम्मीदवार मैदान में

वार्ड 35 महिला आरक्षित है। यहां भाजपा की सुशीला जेठा और कांग्रेस की अनुराधा व्यास के बीच मुख्य मुकाबला है। इनके अलावा तीन निर्दलीय महिला प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं।

निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी से दोनों प्रमुख दलों के वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में मामूली अंतर से परिणाम बदलने की स्थिति बन सकती है।

वार्ड 36 से 40 तक कई सीटों पर निर्दलीयों का असर

वार्ड 36 में भाजपा के लोकेश कुमार और कांग्रेस के साजिद खां के बीच कड़ा मुकाबला है। दोनों दल अपने पारंपरिक मतदाताओं को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

वार्ड 37 में भाजपा की गीता सोनी और कांग्रेस की ममता आमने-सामने हैं। दो निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जो दोनों दलों के वोटों में सेंध लगा सकते हैं।

वार्ड 38 में भाजपा के छोटूराम और कांग्रेस के हसनाराम के बीच मुकाबला है। तीन निर्दलीयों की मौजूदगी ने इसे बहुकोणीय बना दिया है।

वार्ड 39 में भाजपा की मनमी और कांग्रेस की सुनीता घारू के बीच महिला उम्मीदवारों का मुकाबला है। यहां भी तीन निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समीकरण प्रभावित कर सकते हैं।

वार्ड 40 में भाजपा की दिव्या और कांग्रेस की किरण के बीच मुख्य मुकाबला है। तीन निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में होने से नतीजे पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वार्ड 41 और 42 में मुकाबला और भी पेचीदा

वार्ड 41 में भाजपा के मगन सैन और कांग्रेस के कल्याण सिंह के बीच सीधी टक्कर है। लेकिन चार निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में होने से यहां मुकाबला आसान नहीं रह गया है।

वार्ड 42 में भाजपा के ललित कुमार और कांग्रेस के रहीम बख्श के साथ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के भूपेंद्र धरा भी चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं। ऐसे में यह मुकाबला बहुकोणीय हो गया है और वोटों का बंटवारा नतीजे को प्रभावित कर सकता है।

वार्ड 43 से 45 तक भी रोचक मुकाबले

वार्ड 43 में भाजपा की करुणा और कांग्रेस की निरमा के बीच मुकाबला है। दो निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

वार्ड 44 में भाजपा की बदामी देवी और कांग्रेस की प्रतीक्षा आमने-सामने हैं। दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

वार्ड 45, नगरपरिषद का अंतिम वार्ड, में भाजपा के सालमसिंह और कांग्रेस के मेघराज सिंह के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां एक निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में है।

रिश्तेदारियों से लेकर निर्दलीयों तक, हर वार्ड में अलग गणित

जैसलमेर के इन वार्डों में चुनावी मुकाबले की तस्वीर एक जैसी नहीं है। कहीं भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है तो कहीं निर्दलीयों ने मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना दिया है। वहीं वार्ड 34 जैसे मुकाबलों में पारिवारिक रिश्ते भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन गए हैं।

अब अंतिम समय में प्रत्याशियों का पूरा फोकस वोटरों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने और अपने पक्ष में मतदान कराने पर है। ऐसे में किस वार्ड में निर्दलीय वोट काटेंगे और कहां मुख्य दलों के बीच सीधा मुकाबला परिणाम तय करेगा, इसका फैसला मतदान और मतगणना के बाद ही होगा।

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Stv News Rajasthan

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