राजस्थान के छोटे शहरों का कायाकल्प: 5 साल में 15,800 करोड़ के मेगा इंफ्रा प्लान पर मुहर, बदलेगी तस्वीर
राजस्थान सरकार ने प्रदेश के शहरीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अगले पांच वर्षों में नगर निकायों को 15,800 करोड़ रुपये की विशाल राशि से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किया जाएगा। केंद्र सरकार के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) और हुडको (HUDCO) के सहयोग से तैयार इस मेगा प्लान का मुख्य उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों को महानगरों जैसी सुविधाओं से लैस करना है। इससे सड़क, सीवरेज और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को बल मिलेगा।
मेगा प्लान और हुडको के साथ तकनीकी साझेदारी
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्वायत्त शासन विभाग और हुडको के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के बाद शहरी स्थानीय निकायों को परियोजना निर्माण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में तकनीकी सहयोग मिलेगा। योजना में सड़क निर्माण, सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम, ठोस कचरा प्रबंधन, तथा स्ट्रीट लाइटिंग जैसी अत्यावश्यक सुविधाओं को शामिल किया गया है। हुडको की विशेषज्ञता से वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे शहरों का समग्र चेहरा बदल जाएगा।
4 गुना तेजी से विकास का लक्ष्य
स्वायत्त शासन और नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया है कि बढ़ते शहरीकरण की मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार 4 गुनी गति से काम करेगी। उनका मानना है कि आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना का विकास ही समय की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड के तहत समयबद्ध तरीके से विकास कार्यों को जमीन पर उतारा जाएगा। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने में राजस्थान का एक मजबूत कदम साबित होगी।
टियर-2 और टियर-3 शहरों पर होगा विशेष फोकस
केंद्र सरकार की ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) योजना एक प्रतिस्पर्धी वित्तपोषण मॉडल पर आधारित है, जिसका विशेष ध्यान टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास पर है। इस फंड का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार, 25 प्रतिशत राज्य सरकार-स्थानीय निकाय और शेष 50 प्रतिशत वित्तीय संस्थानों द्वारा वहन किया जाता है। परियोजनाओं की गुणवत्ता, नवाचार और समावेशिता के आधार पर फंडिंग मिलेगी। इससे छोटे शहरों में भी महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और पलायन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
केंद्र से मिलेंगे 3,950 करोड़, अधिकारियों को निर्देश
राजस्थान के लिए प्रस्तावित 15,800 करोड़ रुपये की कुल परियोजनाओं में केंद्र सरकार सीधे तौर पर लगभग 3,950 करोड़ रुपये का योगदान देगी। स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे समावेशी, व्यावहारिक और बैंकेबल (ऋण योग्य) परियोजनाओं की जल्द पहचान करें। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण डीपीआर तैयार करने पर जोर दिया ताकि फंड की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए और विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।
शहरीकरण की चुनौतियों पर लगेगी प्रभावी रोक
तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने छोटे शहरों के सामने बुनियादी सुविधाओं का बड़ा संकट खड़ा कर दिया था, जिससे जलभराव, कचरा निस्तारण और यातायात जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। इस मेगा इंफ्रा प्लान से न केवल इन चुनौतियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। निर्माण कार्यों से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निवासियों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह योजना राजस्थान के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास का एक मजबूत आधार स्तंभ बनेगी।