टोंक में प्रेमिका की हत्या के मामले में चार दोषियों को उम्रकैद, जज ने कविता के जरिए सुनाया फैसला
टोंक जिले के पचेवर थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में हुई सुमन की मौत के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। एससी-एसटी कोर्ट की विशिष्ट न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने प्रेमी प्रधान, उसकी मां संजना देवी, भाई सवाईराम और बहन सुशीला को हत्या का दोषी माना। अभियोजन के अनुसार, सुमन और प्रधान के बीच प्रेम संबंध था। आरोप है कि सुमन को धोखे से जहर दिया गया। इसके बाद उसकी मौत हो गई। अदालत ने फैसला सुनाते समय कविता के जरिए घटना और न्याय का संदेश भी सामने रखा।
प्रेम संबंध के बाद बिगड़ी कहानी
सुमन टोंक के नगर गांव की रहने वाली थी। वह जयपुर के वैशाली नगर में किराए के मकान में रहती थी। अभियोजन के मुताबिक, उसका शिकारपुरा निवासी प्रधान के साथ प्रेम संबंध था। 11 सितंबर 2022 को प्रधान सुमन को नगर लेकर आया था। इसके बाद वह जयपुर लौट गया।कुछ दिन बाद सुमन की तबीयत खराब होने की जानकारी उसके परिवार को दी गई। प्रधान ने परिजनों को बताया कि सुमन को सांप ने काट लिया है। उसे अजमेर के अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले हो चुकी थी मौत
सुमन के परिजन जब अजमेर पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। परिवार शव को गांव लेकर आया। इसके बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि, कुछ समय बाद परिजनों को उसकी मौत की परिस्थितियों पर संदेह हुआ। सुमन के भाई ने पचेवर थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई।पुलिस जांच में जहर देने की बात सामने आई। जांच के दौरान पुलिस ने प्रधान के साथ उसकी मां, भाई और बहन की भूमिका भी बताई। इसके बाद चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया।
चारों आरोपियों को उम्रकैद
बुधवार को एससी-एसटी कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने प्रधान पुत्र जगदीश, उसकी मां संजना देवी, भाई सवाईराम और बहन सुशीला को हत्या का दोषी माना। चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
कविता के जरिए दिया न्याय का संदेश
फैसला सुनाते हुए जज आरती माहेश्वरी ने कविता के माध्यम से घटना का उल्लेख किया। उन्होंने प्रेम, विश्वासघात और न्याय को कविता में पिरोया। अदालत ने संदेश दिया कि प्रेम अपराध नहीं है, लेकिन विश्वासघात और हत्या के लिए कानून के तहत सजा तय है।जज आरती माहेश्वरी इससे पहले वर्ष 2025 में किसान हत्याकांड में भी कविता के जरिए फैसला सुना चुकी हैं। उस मामले में भी उन्होंने कविता के माध्यम से पीड़ित और घटना के संदर्भ को अदालत के सामने रखा था।