ट्रक ड्राइवर पिता ने कर्ज लेकर भेजा कनाडा, बेटे ने रचा इतिहास; पावरलिफ्टिंग में जीता गोल्ड
राजस्थान के जोधपुर जिले के पड़ियाल गांव से निकले महेश कुमार बेनीवाल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार उपलब्धि हासिल की है। कनाडा में आयोजित कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में महेश ने पावरलिफ्टिंग जूनियर 120 किलो वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उनकी इस सफलता के पीछे परिवार का बड़ा आर्थिक संघर्ष भी जुड़ा है। महेश को प्रतियोगिता में भेजने के लिए परिवार ने करीब छह लाख रुपए जुटाए। उनके ट्रक ड्राइवर पिता ने करीब चार लाख रुपए का कर्ज लिया। बाकी राशि परिवार की बचत से जुटाई गई। इसके बाद महेश कनाडा पहुंचे और शानदार प्रदर्शन करते हुए तिरंगा लहराया।
छह खिलाड़ियों के बीच महेश ने मारी बाजी
जूनियर 120 किलो वर्ग में कुल छह खिलाड़ियों के बीच मुकाबला हुआ। महेश ने तीनों प्रमुख लिफ्ट में मजबूत प्रदर्शन किया। उन्होंने स्क्वेट में 280 किलो वजन उठाया। इसके बाद बेंच प्रेस में 172 किलो का भार उठाया। डेडलिफ्ट में उन्होंने 300 किलो वजन उठाकर शानदार प्रदर्शन किया।300 किलो की डेडलिफ्ट उनके प्रदर्शन का अहम हिस्सा रही। इन प्रयासों के आधार पर महेश ने अपने वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। इस वर्ग में राजस्थान से वे अकेले प्रतिनिधि थे।
पिता ने बेटे के लिए लिया चार लाख का कर्ज
महेश की अंतरराष्ट्रीय सफलता के पीछे उनके परिवार की मेहनत भी अहम रही। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए करीब छह लाख रुपए की जरूरत थी। परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना आसान नहीं था।महेश के पिता ट्रक चलाते हैं। उन्होंने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए ट्रक पर करीब चार लाख रुपए का लोन लिया। बाकी रकम परिवार ने अपनी बचत से जुटाई। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने महेश का साथ नहीं छोड़ा।
पढ़ाई के साथ पावरलिफ्टिंग का सफर
महेश पढ़ाई के साथ खेल को भी आगे बढ़ा रहे हैं। वह वर्तमान में विद्या भवन रूरल इंस्टीट्यूट में एमए की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने पिछले साल संस्थान में प्रवेश लिया था।संस्थान की प्रबंधक सीओ राजेंद्र भट्ट, कनिका शर्मा और शारीरिक शिक्षक नीरू श्रीमाली ने उन्हें प्रोत्साहित किया। महेश के अनुसार संस्थान से मिले सहयोग ने उनके अभ्यास को जारी रखने में मदद की। आर्थिक परेशानियों के बीच पढ़ाई और खेल दोनों को संभालना उनके सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
हैदराबाद की नेशनल प्रतियोगिता बनी टर्निंग पॉइंट
महेश के अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआत राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से हुई। जुलाई में हैदराबाद में जूनियर 120 किलो वर्ग की नेशनल प्रतियोगिता आयोजित हुई थी। इस वर्ग में आठ खिलाड़ियों के बीच मुकाबला हुआ।महेश ने यहां बेहतर प्रदर्शन किया। इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता के लिए हुआ। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुकाबले की तैयारी तेज कर दी।
कोच की निगरानी में की तैयारी
महेश के मुख्य कोच गुरुविंदर सिंह हैं। वह अंबाला में रेलवे के कोच हैं। महेश फरवरी में उनके संपर्क में आए थे। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में कोच की निगरानी में ट्रेनिंग ली।जोधपुर लौटने के बाद भी उनका प्रशिक्षण नहीं रुका। उन्होंने ऑनलाइन मार्गदर्शन के जरिए अभ्यास जारी रखा। लगातार ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।
संघर्ष से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
महेश की कहानी खेल के साथ परिवार के संघर्ष की कहानी भी है। एक तरफ पिता ने बेटे के सपने के लिए कर्ज लिया। दूसरी तरफ महेश ने लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं के जरिए अपनी जगह बनाई।कनाडा में गोल्ड जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी उपलब्धि के बाद परिवार और उनके गांव में खुशी का माहौल है। सीमित संसाधनों के बावजूद महेश ने मेहनत के दम पर पावरलिफ्टिंग में अपनी पहचान बनाई है।