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CJP Protest: लाठीचार्ज पर शशि थरूर ने सरकार से पूछे सवाल, संसद में चर्चा की मांग

जंतर-मंतर पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हुए हंगामे को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था तो लाठीचार्ज की आवश्यकता क्यों पड़ी। साथ ही उन्होंने संसद को जनहित के मुद्दों पर खुली चर्चा का मंच बताते हुए सरकार से विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर देने की अपील की।

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज क्यों?’

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने कहा कि किसी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो तो संवाद को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। थरूर ने कहा कि लाठीचार्ज हिंसा का रूप है और ऐसे कदमों के पीछे का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।

संसद जनता की आवाज उठाने का मंच है

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित होने पर भी थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद का मूल उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना और जनता की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाना है। उनके अनुसार, विपक्ष विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों पर बहस चाहता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे विषयों पर खुली चर्चा होना आवश्यक है।

‘बहुमत सरकार के पास है, लेकिन विपक्ष की बात भी सुनी जाए’

थरूर ने कहा कि यह स्पष्ट है कि सरकार के पास सदन में बहुमत है और अंतिम निर्णय उसी का होगा। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि बहुमत का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि विपक्ष की बात सुनी ही न जाए। उनके मुताबिक संसद ऐसा मंच होना चाहिए, जहां अलग-अलग क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि अपने मतदाताओं की चिंताओं और सुझावों को खुलकर रख सकें, ताकि नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक समावेशी बन सके।

‘सिर्फ विधेयक पारित करने तक सीमित नहीं हो सकती संसद’

कांग्रेस सांसद ने कहा कि संसद का उद्देश्य केवल सरकारी विधेयकों को पारित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा तो संसद की भूमिका सीमित हो जाएगी। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती इसी में है कि सरकार और विपक्ष दोनों अपनी बात रखें, बहस हो और उसके बाद निर्णय लिए जाएं।

आपसी सहयोग से चले संसद, थरूर ने दिया संवाद का सुझाव

शशि थरूर ने प्रधानमंत्री की ओर से विपक्ष से सहयोग की अपील का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सहयोग की भावना से आगे बढ़ेगी तो विपक्ष भी सकारात्मक भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार, सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए जरूरी है कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की अनुमति दे। संवाद और सहयोग ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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