शहबाज शरीफ के ट्रंप वाले पोस्ट पर उठा विवाद, कंवल सिब्बल ने कसा तंज
फीफा विश्व कप में स्पेन की जीत पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है। स्पेन को बधाई देने के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी प्रशंसा करने पर पूर्व भारतीय विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तंज कसते हुए इसे पाकिस्तान की कूटनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़ दिया। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
स्पेन की जीत के साथ ट्रंप का जिक्र बना चर्चा का विषय
फीफा विश्व कप जीतने पर शहबाज शरीफ ने स्पेन की टीम को बधाई दी। हालांकि उनके संदेश में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विशेष उल्लेख और प्रशंसा भी शामिल थी। इसी वजह से उनका पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि फुटबॉल टूर्नामेंट की बधाई में ट्रंप का उल्लेख क्यों किया गया, जबकि प्रतियोगिता से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। यही वजह रही कि यह पोस्ट खेल से ज्यादा राजनीति और कूटनीति की बहस का हिस्सा बन गया।
कंवल सिब्बल ने पोस्ट पर कसा व्यंग्य
भारत के पूर्व विदेश सचिव और जेएनयू के कुलाधिपति कंवल सिब्बल ने शहबाज शरीफ के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए व्यंग्य किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो डोनाल्ड ट्रंप इस मैच के अंपायर रहे हों। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि पाकिस्तान का ध्यान भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर अधिक दिखाई देता है। सिब्बल की इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिली और कई यूजर्स ने भी इस पर अपनी राय व्यक्त की।
पाकिस्तान की फुटबॉल टीम को लेकर भी टिप्पणी
कंवल सिब्बल ने अपने बयान में पाकिस्तान की फुटबॉल टीम के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की टीम इस विश्व कप के लिए क्वालीफाई तक नहीं कर सकी और शुरुआती चरण में ही बाहर हो गई। उनके इस बयान को पाकिस्तान की खेल स्थिति और सरकार की प्राथमिकताओं पर व्यंग्य के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर भी कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पर भी उठे सवाल
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया के तनाव के दौरान अमेरिका ने ईरान से संवाद स्थापित करने की कोशिशों में पाकिस्तान के सहयोग की बात की थी। इसी संदर्भ में पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता को लेकर भी कई राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय परिस्थितियां लगातार बदलती रहीं और शांति प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। हालांकि इन घटनाओं को लेकर अलग-अलग देशों और विशेषज्ञों की राय भी अलग रही है।