कोटा जेके लोन अस्पताल पर गंभीर आरोप: थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में HIV संक्रमण की शिकायत, जांच समिति गठित
राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को दिए गए ब्लड ट्रांसफ्यूजन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। दो बच्चों के एचआईवी संक्रमित पाए जाने के बाद परिजनों ने अस्पताल के ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर संक्रमण का आरोप लगाया है। हालांकि अस्पताल प्रशासन और ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
दो बच्चों के HIV संक्रमित मिलने के बाद उठे सवाल
मामले ने तब तूल पकड़ा जब थैलेसीमिया से पीड़ित दो बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी सामने आई। परिजनों का आरोप है कि नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान संक्रमण हुआ। इनमें एक 8 वर्षीय बालिका कोटा की निवासी है, जबकि दूसरा मामला बूंदी के 13 वर्षीय बालक से जुड़ा है। दोनों बच्चों का इलाज अलग-अलग समय पर जेके लोन अस्पताल में हुआ था। परिजनों का कहना है कि पहले कराई गई जांच में एचआईवी की रिपोर्ट निगेटिव थी, जबकि हाल की जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
मेडिकल कॉलेज ने बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन के अनुसार, जिला प्रशासन से प्राप्त सूचना के आधार पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति में शिशु रोग विभाग, ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल किया गया है। समिति ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़े रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, उपचार प्रक्रिया और अन्य तथ्यों की समीक्षा करेगी। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
ब्लड बैंक ने आरोपों को किया खारिज
जेके लोन अस्पताल के ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने ब्लड से संक्रमण फैलने की संभावना से इनकार किया है। विभागाध्यक्ष डॉ. परमेंद्र पचौरी का कहना है कि अस्पताल में थैलेसीमिया मरीजों को दिए जाने वाले रक्त की जांच अत्याधुनिक न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) तकनीक से की जाती है। उनके अनुसार यह जांच संक्रमण का शुरुआती स्तर पर भी पता लगाने में सक्षम मानी जाती है, जिससे संक्रमित रक्त चढ़ने की संभावना बेहद कम हो जाती है। विभाग का दावा है कि अस्पताल में उपलब्ध कराया जाने वाला रक्त निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप है।
संक्रमण के अन्य कारणों की भी होगी जांच
विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी संक्रमण केवल ब्लड ट्रांसफ्यूजन से ही नहीं, बल्कि अन्य कई कारणों से भी हो सकता है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, संबंधित बच्चों का उपचार अन्य अस्पतालों में भी हुआ है, जहां उन्हें इंजेक्शन, ड्रिप या अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाएं दी गई थीं। जांच समिति इस बात की भी पड़ताल करेगी कि संक्रमण का स्रोत क्या था और क्या इसका संबंध किसी अन्य उपचार केंद्र से हो सकता है। फिलहाल किसी एक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और बिना वैज्ञानिक साक्ष्यों के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। समिति सभी मेडिकल रिकॉर्ड, प्रयोगशाला रिपोर्ट और उपचार संबंधी दस्तावेजों की समीक्षा करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं परिजनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।