#क्राइम #देश दुनिया #राज्य-शहर

राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व के 1 से 10 किलोमीटर दायरे में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की अनुमति के बिना 22 से अधिक खनन इकाइयों के संचालन का मामला सामने आया है…

जिम्मेदारी पर विभागों में टकराव

खनन विभाग और वन विभाग के बीच कार्रवाई को लेकर स्पष्टता नहीं दिख रही है।

  • खनि अभियंता का कहना है कि सरिस्का प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाती है।
  • वहीं, डीएफओ का कहना है कि दूरी का आकलन उनका काम है, जबकि कार्रवाई खनन विभाग को करनी चाहिए।

इस खींचतान के बीच प्रशासनिक स्तर पर भी चुप्पी बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार थानागाजी के झिरी और टहला क्षेत्र में ये खानें संचालित हैं। नियमों के मुताबिक 1 से 10 किमी के दायरे में वही खनन इकाइयां संचालित हो सकती हैं, जिनके पास NBWL की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) हो।

एक खान पर कार्रवाई, बाकी पर मौन क्यों?

हाल ही में वन मंडल की रिपोर्ट के आधार पर एक खान को बंद कराया गया, क्योंकि उसने NBWL मानकों का पालन नहीं किया था। लेकिन अन्य 22 से अधिक खानों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

खनन विभाग का तर्क है कि बिना सरिस्का प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट के वे आगे कार्रवाई नहीं कर सकते। इससे सवाल उठता है कि रिपोर्ट देने में देरी क्यों हो रही है?


सुप्रीम कोर्ट के आदेश और नियम

सुप्रीम कोर्ट के गोदावर्मन केस के बाद संवेदनशील वन क्षेत्रों में खनन पर सख्त दिशा-निर्देश लागू किए गए थे। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि ऐसे क्षेत्रों में खनन के लिए NBWL की अनुमति अनिवार्य है।

राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने भी 2022 में आदेश जारी कर संबंधित अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के पालन के निर्देश दिए थे।

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *