अलवर निकाय चुनाव में Gen-Z पर नजर, BJP-कांग्रेस तलाश रहीं युवा चेहरे
अलवर। नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा और कांग्रेस ने युवा मतदाताओं पर फोकस बढ़ा दिया है। खासतौर पर Gen-Z वोटरों को साधने के लिए दोनों दल ऐसे युवा चेहरों की तलाश कर रहे हैं, जिनकी अपने वार्ड में मजबूत पकड़ और युवाओं के बीच सक्रियता हो। टिकट वितरण में राजनीतिक आधार के साथ युवा अपील को भी महत्व दिए जाने के संकेत हैं। स्थापित नेताओं के परिवारों से जुड़े युवाओं को भी चुनाव मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है। अलवर नगर निगम क्षेत्र में करीब 51,827 Gen-Z मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 19.5 प्रतिशत हैं।
युवा चेहरों की तलाश में जुटी भाजपा-कांग्रेस
नगर निगम चुनाव में दोनों प्रमुख दल संभावित प्रत्याशियों के राजनीतिक प्रभाव, संगठनात्मक सक्रियता और स्थानीय पकड़ का आकलन कर रहे हैं। इसके साथ ही युवा चेहरों को भी प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम चल रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि युवा प्रत्याशी अपने वार्ड के नए मतदाताओं से सीधे संवाद स्थापित करने में अधिक प्रभावी हो सकते हैं। यही वजह है कि कई ऐसे युवाओं को भी चुनावी राजनीति में आगे लाने की कोशिश हो रही है, जिनका संबंध राजनीतिक परिवारों से है और जो पहले से सामाजिक या संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हैं।
कांग्रेस ने पर्यवेक्षकों को दिए युवा चेहरे तलाशने के निर्देश
कांग्रेस ने वार्डवार संभावित उम्मीदवारों की तलाश के दौरान युवा दावेदारों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। पार्टी के चुनाव पर्यवेक्षकों से कहा गया है कि मौजूदा दावेदारों के साथ ऐसे युवाओं की पहचान की जाए, जिनकी स्थानीय स्तर पर सक्रियता और जनसंपर्क मजबूत है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि युवा प्रत्याशी रोजगार, शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं, खेल और शहर के विकास जैसे मुद्दों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकते हैं। आने वाले दिनों में संभावित उम्मीदवारों की सूची में युवा चेहरों की संख्या बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
शिक्षा और रोजगार के मुद्दों से युवाओं को जोड़ने की कोशिश
कांग्रेस लंबे समय से युवाओं के बीच शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है। पार्टी की ओर से विभिन्न स्तरों पर युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। अलवर में पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में युवाओं से जुड़े कार्यक्रम होने की बात सामने आई है। वहीं यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई को कॉलेज स्तर पर युवाओं से संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी का प्रयास है कि संगठन और चुनावी अभियान में युवा कार्यकर्ताओं की भूमिका को और मजबूत किया जाए।
40 साल से कम उम्र के उम्मीदवारों पर कांग्रेस का फोकस
कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश गंगावत के अनुसार, पार्टी निकाय चुनाव में करीब 75 प्रतिशत टिकट 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों को देने की तैयारी कर रही है। हालांकि अंतिम टिकट वितरण पार्टी की चुनावी रणनीति और वार्डवार समीकरणों के आधार पर होगा। युवा उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने की यह रणनीति पार्टी के लिए दोहरा फायदा देने वाली मानी जा रही है। एक तरफ इससे पार्टी संगठन में नई पीढ़ी को प्रतिनिधित्व मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ युवा प्रत्याशियों के जरिए युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा सकेगा।
अलवर में 51,827 Gen-Z वोटर, 19.5% हिस्सेदारी
अलवर नगर निगम क्षेत्र में करीब 2.66 लाख मतदाता हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें 51,827 मतदाता Gen-Z आयु वर्ग से जुड़े हैं। इनमें 18-19 वर्ष के 3,838 मतदाता हैं, जबकि 20-29 वर्ष की आयु के 47,985 मतदाता शामिल हैं। इस समूह में 26,704 पुरुष, 21,281 महिलाएं और 3 ट्रांसजेंडर मतदाता बताए गए हैं। कुल मतदाताओं में Gen-Z की हिस्सेदारी करीब 19.5 प्रतिशत बैठती है। यह संख्या किसी भी पार्टी के चुनावी गणित को प्रभावित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
युवा वोटरों के मुद्दे बन सकते हैं चुनावी एजेंडा
Gen-Z मतदाताओं की संख्या को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस के चुनावी अभियानों में युवाओं से जुड़े मुद्दों को अधिक जगह मिलने की संभावना है। शिक्षा, रोजगार, डिजिटल सुविधाएं, स्टार्टअप, खेल और शहर में बेहतर अवसर जैसे विषय युवा मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। केवल टिकट वितरण ही नहीं, बल्कि दोनों दलों की प्रचार रणनीति में भी युवाओं की भागीदारी बढ़ सकती है। ऐसे में नगर निगम चुनाव में इस बार युवा चेहरों और युवा मुद्दों का प्रभाव पहले के मुकाबले अधिक दिखाई देने की संभावना है।