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47 डिग्री गर्मी में संत की अग्नि साधना, सात अग्नियों के बीच 9 दिन का तप

सात अग्नि के बीच 9 दिन की तपस्या ने श्रद्धालुओं को किया हैरान

Alwar जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र में नौतपा की भीषण गर्मी के बीच एक संत की कठोर अग्नि साधना इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जहां 47 डिग्री तापमान में लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, वहीं Rajendra Giri Maharaj सात अग्नियों के बीच बैठकर कठिन तपस्या कर रहे हैं। आग की प्रचंड लपटों और तेज गर्मी के बीच संत की एकाग्र साधना को देखकर श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित नजर आ रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर पहुंचकर उनके दर्शन कर रहे हैं।

सात अग्नियों के बीच चल रही कठिन तपस्या

यह विशेष अग्नि साधना गोविंदगढ़ के न्याना गांव से करीब दो किलोमीटर दूर कैमासा रोड स्थित राजपूत मंदिर परिसर में की जा रही है। संत राजेंद्र गिरी महाराज सात दिशाओं में जल रही अग्नि के बीच बैठकर तप कर रहे हैं। तपस्या के दौरान उन्होंने करीब तीन घंटे तक पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं की। तेज धूप और धधकती आग के बीच उनका शांत और स्थिर भाव लोगों को हैरान कर रहा है।

विधि-विधान से शुरू हुई साधना

तपस्या प्रारंभ करने से पहले संत ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। स्नान करने के बाद उन्होंने शरीर पर भस्म लगाई और फिर अग्नि साधना शुरू की। आग की तीव्र गर्मी के कारण श्रद्धालु दूर से ही परिक्रमा कर रहे हैं, लेकिन संत लगातार पूरी एकाग्रता के साथ तप में लीन हैं। मंदिर परिसर में पूरे समय श्रद्धालुओं की भीड़ बनी हुई है।

जनकल्याण और धर्म प्रचार का उद्देश्य

Rajendra Giri Maharaj के अनुसार यह साधना धर्म के प्रचार-प्रसार, क्षेत्र की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की भावना से की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह तपस्या उनके गुरु के आशीर्वाद से हो रही है और लगातार नौ दिनों तक चलेगी। संत का कहना है कि कठिन साधना से आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्रद्धालुओं में बढ़ा आकर्षण

इस अनूठी अग्नि साधना को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। लोग संत की तपस्या को आस्था और संकल्प का प्रतीक मान रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच संत की सहनशक्ति और साधना को देखकर लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं। मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा हुआ है।

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