पाकिस्तान की ओर बढ़ती रूस की दिलचस्पी के क्या हैं मायने? पुतिन के बयान से शुरू हुई नई चर्चा
रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर दक्षिण एशिया की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पाकिस्तान संबंधी बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या मॉस्को अपनी पारंपरिक विदेश नीति में बदलाव के संकेत दे रहा है। हालांकि रूस और भारत के रिश्ते अब भी मजबूत माने जाते हैं, लेकिन पाकिस्तान के साथ बढ़ता संवाद क्षेत्रीय रणनीति के नए आयामों की ओर इशारा कर रहा है।
पुतिन के बयान ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण और स्वतंत्र देश बताते हुए उसके विभिन्न देशों के साथ संबंधों का उल्लेख किया। पुतिन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रूस और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तथा आर्थिक संपर्क बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि रूस की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
अफगानिस्तान और क्षेत्रीय राजनीति बना अहम कारण
विश्लेषकों के अनुसार रूस की पाकिस्तान में बढ़ती रुचि के पीछे अफगानिस्तान एक महत्वपूर्ण कारक है। अफगानिस्तान में बदलते राजनीतिक हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच मॉस्को दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और अफगान मामलों में उसकी भूमिका रूस के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के प्रयास देखे जा रहे हैं।
अमेरिका से संवाद का नया माध्यम भी बन सकता है पाकिस्तान
कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस पाकिस्तान को केवल क्षेत्रीय सहयोगी के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि उसे पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका तक संवाद पहुंचाने के संभावित माध्यम के रूप में भी आंक रहा है। पाकिस्तान की विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ सक्रिय कूटनीतिक मौजूदगी मॉस्को के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। ऐसे में रूस की पाकिस्तान नीति केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक समीकरणों से जुड़ी नजर आती है।
भारत अब भी रूस का प्रमुख रणनीतिक साझेदार
रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संपर्कों के बावजूद भारत और रूस के संबंधों की अहमियत कम नहीं हुई है। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और रणनीतिक सहयोग के कई क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी दशकों पुरानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मॉस्को फिलहाल संतुलन की नीति अपनाते हुए दक्षिण एशिया के सभी प्रमुख देशों के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है। इसलिए पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों को भारत-रूस संबंधों के विकल्प के रूप में देखना जल्दबाजी हो सकती है।