गहलोत ने फिर खोली मानेसर वाली फाइल, पायलट पर बयान से राजस्थान कांग्रेस में बढ़ी सियासी गर्मी
राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच लंबे समय से चली आ रही सियासी खींचतान एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मानेसर प्रकरण और 25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विधायकों का विरोध पार्टी हाईकमान के खिलाफ नहीं, बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना के खिलाफ था। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम का किया जिक्र
अशोक गहलोत ने कहा कि जब उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा चल रही थी और उनकी जगह नए मुख्यमंत्री के रूप में सचिन पायलट का नाम सामने आ रहा था, तब बड़ी संख्या में विधायक एकजुट हो गए थे। गहलोत का दावा है कि विधायकों की नाराजगी किसी व्यक्ति विशेष को लेकर थी, न कि कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ। उन्होंने कहा कि कई विधायक उस नेता को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे, जिसे वे 2020 के मानेसर प्रकरण से जोड़कर देखते थे।
मानेसर विवाद को फिर किया याद
गहलोत ने एक बार फिर 2020 की राजनीतिक उठापटक का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी और सरकार को बचाने के लिए कांग्रेस विधायकों ने एकजुटता दिखाई थी। उनके अनुसार यही वजह थी कि बाद के घटनाक्रम में भी कई विधायक पायलट के नेतृत्व को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे।
‘हम दुश्मन नहीं हैं’ – गहलोत
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके मन में सचिन पायलट के प्रति व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह उन्हें लंबे समय से जानते हैं और हमेशा स्नेह की दृष्टि से देखते रहे हैं। गहलोत ने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर उनके मन में कोई कटुता नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में फैसले परिस्थितियों और सलाहकारों के प्रभाव से भी प्रभावित होते हैं।
पुष्कर शिविर के बाद बढ़ीं चर्चाएं
गहलोत का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में कांग्रेस का चिंतन शिविर आयोजित हुआ था। शिविर में उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुईं। हालांकि उनके समर्थकों ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य कारणों और पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के चलते वह पूरे आयोजन में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
पायलट की भूमिका पर अटकलें
राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के भविष्य और संगठनात्मक बदलावों को लेकर भी अटकलें तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सचिन पायलट को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे माहौल में गहलोत का बयान विशेष महत्व रखता है।
पायलट खेमे की चुप्पी
गहलोत के ताजा बयान पर फिलहाल सचिन पायलट या उनके समर्थकों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस बयान को राजस्थान कांग्रेस के भीतर जारी नेतृत्व संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इन पुराने विवादों को पीछे छोड़कर एकजुटता का संदेश देती है या फिर यह सियासी खींचतान आगे भी जारी रहती है।