अजमेर के खेत में मिला दुर्लभ हिमालयन ग्रिफन गिद्ध, वन विभाग ने रेस्क्यू कर जयपुर भेजा
राजस्थान के अजमेर जिले में वन विभाग ने एक दुर्लभ हिमालयन ग्रिफन (Himalayan Griffon) गिद्ध का सफल रेस्क्यू किया है। घूघरा गांव के पास एक खेत में घायल अवस्था में मिले इस विशाल पक्षी को पहले अजमेर के पशु चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार दिया गया। हालत गंभीर होने पर विशेषज्ञ इलाज के लिए उसे जयपुर रेफर किया गया। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और दुर्लभ गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण की आवश्यकता को फिर से चर्चा में ला दिया है।
खेत में घायल मिला दुर्लभ गिद्ध
घूघरा गांव के पास लाडपुरा रोड स्थित एक खेत में बड़े आकार के घायल पक्षी के होने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान पक्षी की पहचान हिमालयन ग्रिफन गिद्ध के रूप में की गई। सूचना मिलते ही विभाग की कोबरा रेस्क्यू टीम के सदस्य सुखदेव भट्ट ने मौके पर पहुंचकर सावधानीपूर्वक पक्षी को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की जानकारी संबंधित वन अधिकारियों को दी गई और गिद्ध को तत्काल उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया।
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प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर किया गया रेफर
रेस्क्यू के बाद घायल गिद्ध को अजमेर के शास्त्री नगर स्थित पशु चिकित्सालय ले जाया गया, जहां पशु चिकित्सकों ने उसकी जांच और प्राथमिक चिकित्सा की। चिकित्सकों के अनुसार पक्षी की स्थिति गंभीर थी और उसे विशेष चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता थी। बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए उसे जयपुर रेफर करने का निर्णय लिया गया। अब विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार किया जाएगा, ताकि उसके स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है हिमालयन ग्रिफन
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयन ग्रिफन एशिया की दुर्लभ गिद्ध प्रजातियों में शामिल है, जिसकी संख्या लगातार घट रही है। यह पक्षी मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है और प्राकृतिक सफाई व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। गिद्ध मृत पशुओं को खाकर संक्रमण फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रजाति का संरक्षण जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है।
वन विभाग ने लोगों से की सहयोग की अपील
वन विभाग ने कहा है कि घायल या दुर्लभ वन्यजीव और पक्षी दिखाई देने पर लोग स्वयं उन्हें पकड़ने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत विभाग को सूचना दें। समय पर सूचना मिलने से सुरक्षित रेस्क्यू और उचित उपचार संभव हो पाता है। अधिकारियों के अनुसार यदि यह हिमालयन ग्रिफन पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है तो उसे विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ा जाएगा। यह रेस्क्यू अभियान वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।