Rajasthan Police Alert: बैंकिंग सेवा बंद या मुंबई पुलिस का डर दिखाकर ठगी, ऐसे कॉल से रहें सावधान
राजस्थान पुलिस ने साइबर फ्रॉड को लेकर आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण अलर्ट जारी किया है। साइबर ठग फोन कॉल के जरिए लोगों को डराकर बैंकिंग और निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। कभी बैंकिंग सेवा बंद होने की बात कही जाती है। वहीं, कुछ मामलों में खुद को मुंबई पुलिस बताकर केस दर्ज होने का डर दिखाया जाता है। ठग खाता नंबर, OTP, PIN या पासवर्ड जैसी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। पुलिस ने लोगों से ऐसे कॉल पर घबराने के बजाय फोन काटने और जानकारी साझा नहीं करने की अपील की है।
बैंकिंग सेवा बंद होने का झांसा देकर कॉल
साइबर ठग अज्ञात नंबरों से लोगों को फोन कर सकते हैं। कॉल पर कहा जाता है कि उनकी बैंकिंग सेवा बंद होने वाली है।कभी खाते में संदिग्ध गतिविधि होने का दावा किया जाता है। इसके बाद समस्या दूर करने के नाम पर बैंकिंग जानकारी मांगी जाती है।पुलिस के अनुसार ऐसे दावों पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। बैंक से जुड़ी किसी समस्या के लिए आधिकारिक चैनल से ही संपर्क करना सुरक्षित है।
मुंबई पुलिस के नाम पर केस का डर
ठगी का दूसरा तरीका सरकारी या पुलिस अधिकारी बनकर डराना है। कॉल करने वाला खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बता सकता है।इसके बाद कहा जाता है कि आपके बैंक खाते या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी अपराध में हुआ है। ठग फर्जी केस, गिरफ्तारी या जांच का डर दिखाकर बातचीत आगे बढ़ाते हैं।ऐसे दबाव में आकर किसी भी तरह की बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। कथित पुलिस अधिकारी की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
OTP और बैंकिंग डिटेल मांगना बड़ा खतरा
साइबर ठग बातचीत के दौरान खाता नंबर, कार्ड की जानकारी, OTP, PIN और पासवर्ड हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।इन जानकारियों का इस्तेमाल अनधिकृत लेनदेन के लिए किया जा सकता है। इसलिए फोन पर किसी अनजान व्यक्ति को ऐसी जानकारी नहीं देनी चाहिए।अगर कॉल करने वाला तुरंत पैसा ट्रांसफर करने या कोई ऐप डाउनलोड करने का दबाव बनाए, तो बातचीत तुरंत बंद कर दें।
डराने के बाद शुरू होता है ठगी का अगला चरण
ऐसे मामलों में पहले व्यक्ति को मानसिक दबाव में लिया जाता है। इसके बाद उसे यह विश्वास दिलाया जाता है कि तत्काल कार्रवाई नहीं करने पर खाता बंद हो जाएगा या गिरफ्तारी हो सकती है।घबराहट में कई लोग ठगों के निर्देशों का पालन कर देते हैं। यही साइबर फ्रॉड का सबसे बड़ा हथकंडा है।पुलिस का संदेश है कि किसी भी सरकारी या बैंकिंग कार्रवाई की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। जल्दबाजी में कोई वित्तीय फैसला न लें।
साइबर फ्रॉड हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें
अगर खाते से पैसे निकल गए हैं या ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हुई है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन है और वित्तीय साइबर फ्रॉड की रिपोर्ट के लिए उपलब्ध है।इसके अलावा शिकायत National Cyber Crime Reporting Portal पर भी दर्ज की जा सकती है। पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी समेत कई तरह के साइबर अपराध रिपोर्ट किए जा सकते हैं।
शिकायत करते समय सबूत सुरक्षित रखें
साइबर अपराध होने के बाद कॉल हिस्ट्री, फोन नंबर, मैसेज और उपलब्ध स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। अगर कॉल रिकॉर्डिंग उपलब्ध है तो उसे भी डिलीट न करें।National Cyber Crime Reporting Portal के दिशा-निर्देशों में भी ऐसे मामलों में कॉल नंबर, तारीख-समय, कॉल रिकॉर्डिंग और बैंकिंग ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।बैंक को भी तुरंत सूचित करें। अगर पैसा ट्रांसफर हुआ है तो ट्रांजेक्शन आईडी या UTR की जानकारी बैंक और पुलिस को दें।
ठगी के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में शिकायत महत्वपूर्ण
वित्तीय साइबर फ्रॉड में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। जल्द शिकायत करने से संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान को रकम पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू करने में मदद मिल सकती है। I4C के दिशा-निर्देश वित्तीय फ्रॉड होने पर तत्काल 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करने पर जोर देते हैं।इसलिए पैसे निकलने के बाद इंतजार न करें। पहले बैंक को सूचित करें और तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
निष्क्रिय बैंक खाते भी रखें सुरक्षित
अगर कोई बैंक खाता लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है तो उसे सक्रिय स्थिति में बिना जरूरत न रखें। ऐसे खातों के गलत इस्तेमाल का जोखिम हो सकता है।हालांकि खाता बंद कराने या किसी अन्य बैंकिंग प्रक्रिया से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक प्रक्रिया की जानकारी लेना जरूरी है।
बैंकिंग कॉल में इन बातों का रखें ध्यान
बैंकिंग समस्या होने पर किसी अनजान नंबर पर भरोसा न करें। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या कार्ड पर दिए सत्यापित संपर्क नंबर का इस्तेमाल करें।किसी व्यक्ति के पुलिस या बैंक अधिकारी होने का दावा करने मात्र से उसकी पहचान प्रमाणित नहीं होती। पहले स्वतंत्र रूप से सत्यापन करें।
याद रखें—डर नहीं, सत्यापन जरूरी है। किसी अनजान कॉल पर OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन साझा न करें।
राजस्थान पुलिस की अपील
राजस्थान पुलिस का संदेश स्पष्ट है। अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग सेवा बंद होने, पुलिस केस या गिरफ्तारी का डर दिखाकर निजी जानकारी मांगता है तो सावधान हो जाएं।कॉल काटें, आधिकारिक माध्यम से जानकारी सत्यापित करें और ठगी होने पर तुरंत रिपोर्ट करें। राजस्थान पुलिस भी साइबर और फोन फ्रॉड से जुड़े मामलों में जांच एवं कार्रवाई के लिए साइबर अपराध तंत्र का इस्तेमाल करती है।