राजस्थान में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें फुल, निजी कॉलेजों में MBBS की 1,039 सीटें खाली
राजस्थान में NEET UG 2026 की तीसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद मेडिकल प्रवेश को लेकर फीस का मुद्दा सामने आया है। उपलब्ध सीट मैट्रिक्स के अनुसार, सरकारी और राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमेस) के कॉलेजों की सीटें भर चुकी हैं। वहीं, निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की 1,039 सीटें खाली बताई गई हैं। निजी कॉलेजों की अधिक फीस, नई सीटों में बढ़ोतरी और काउंसलिंग के नियमों को इसके प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि, काउंसलिंग का परिणाम प्रोविजनल है और जॉइनिंग के बाद सीटों की स्थिति बदल सकती है।
सरकारी और राजमेस कॉलेजों में सभी सीटें भरीं
राजस्थान में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए NEET UG 2026 की तीसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद सीटों की स्थिति सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सरकारी मेडिकल कॉलेजों और राजमेस के अधीन संचालित कॉलेजों की सीटें भर गई हैं।इसके विपरीत, निजी मेडिकल कॉलेजों में 1,039 MBBS सीटें खाली रह गईं। इससे मेडिकल शिक्षा की लागत और विद्यार्थियों की कॉलेज संबंधी प्राथमिकताओं पर चर्चा शुरू हो गई है।हालांकि, यह सीट मैट्रिक्स प्रोविजनल है। अभ्यर्थियों की जॉइनिंग, सीट छोड़ने और दोबारा आवंटन की प्रक्रिया के बाद रिक्त सीटों की संख्या में बदलाव संभव है।
निजी कॉलेजों की फीस 25 लाख रुपए सालाना तक
निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निजी कॉलेजों की फीस करीब 25 लाख रुपए सालाना तक है। वहीं, राजमेस कॉलेजों में यह लगभग 10 लाख रुपए के स्तर पर बताई गई है।दोनों के बीच फीस का बड़ा अंतर विद्यार्थियों के कॉलेज चयन को प्रभावित कर सकता है। कई परिवार कम खर्च वाले विकल्प को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में निजी कॉलेजों की सीटें खाली रहने की एक वजह फीस भी मानी जा रही है।मेडिकल शिक्षा में केवल प्रवेश मिलना पर्याप्त नहीं है। परिवारों को पूरे कोर्स की फीस, हॉस्टल, किताबों और अन्य खर्चों का भी आकलन करना पड़ता है।
फीस कम करने की मांग उठी
अभिभावक डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, खाली सीटें भरने के लिए विद्यार्थियों की योग्यता के मानकों में कमी करने के बजाय फीस निर्धारण पर विचार किया जाना चाहिए।उनका मानना है कि निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस कम होने से अधिक परिवार अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने में सक्षम हो सकते हैं। इससे योग्य विद्यार्थियों के लिए विकल्प बढ़ेंगे और खाली सीटों को भरने में मदद मिल सकती है।हालांकि, फीस में बदलाव के लिए संबंधित नियमों, कॉलेजों की लागत और नियामक व्यवस्था का आकलन भी जरूरी होगा।
NEET क्वालिफाइंग कटऑफ भी चर्चा में
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजस्थान में NEET UG 2026 के लिए सामान्य और EWS श्रेणी का क्वालिफाइंग कटऑफ 213 अंक बताया गया है। वहीं, OBC, SC और ST श्रेणियों के लिए यह 177 अंक है।क्वालिफाइंग कटऑफ का अर्थ परीक्षा में पात्रता हासिल करने के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक है। यह अपने आप में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की गारंटी नहीं देता। वास्तविक प्रवेश रैंक, श्रेणी, उपलब्ध सीटों, कॉलेज की प्राथमिकताओं और काउंसलिंग नियमों पर निर्भर करता है।इसलिए खाली सीटों की स्थिति को केवल NEET के अंकों से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं होगा।
निजी कॉलेजों में सीटें खाली रहने के अन्य कारण
NEET UG काउंसलिंग बोर्ड राजस्थान के चेयरमैन डॉ. बीएल कुमावत के अनुसार, सीटें खाली रहने के पीछे प्रवेश नियमों और न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन भी एक कारण है।इसके अलावा, निजी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 1,100 नई सीटें जुड़ने से कुल उपलब्ध सीटों की संख्या बढ़ी है। अभ्यर्थियों की कॉलेज संबंधी प्राथमिकताएं और फीस चुकाने की क्षमता भी प्रवेश प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।यानी, निजी कॉलेजों में 1,039 सीटें खाली रहने के पीछे कई कारक हो सकते हैं। इनमें फीस, सीटों की बढ़ी संख्या और काउंसलिंग की निर्धारित प्रक्रिया शामिल हैं।
क्या आगे खाली सीटों की संख्या बदलेगी?
तीसरे राउंड के बाद सामने आई सीटों की स्थिति अंतिम नहीं मानी जा सकती। विद्यार्थियों की जॉइनिंग और सीट आवंटन की अगली प्रक्रियाओं के बाद आंकड़ों में बदलाव संभव है।खाली सीटों को भरने के लिए आगे की काउंसलिंग में लागू नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसमें पात्रता और न्यायालय के निर्देशों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा।राजस्थान में मेडिकल शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए फीस, सीटों की उपलब्धता और प्रवेश प्रक्रिया के बीच संतुलन जरूरी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निजी कॉलेजों की रिक्त सीटों को भरने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।