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राजस्थान के बेड़ल गांव से केरलम के राजभवन तक ओम प्रकाश माथुर का सफर, जानिए उनका राजनीतिक जीवन

राजस्थान के पाली जिले के बेड़ल गांव में जन्मे भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश माथुर को केरलम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को राज्यपालों के फेरबदल के तहत यह नियुक्ति की। माथुर इससे पहले सिक्किम के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से राजनीतिक संगठन और राज्यसभा तक का सफर तय करने वाले माथुर राजस्थान भाजपा में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं।

राष्ट्रपति ने ओम प्रकाश माथुर को सौंपी नई जिम्मेदारी

राजस्थान के पाली जिले से ताल्लुक रखने वाले ओम प्रकाश माथुर को केरलम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में इसकी पुष्टि की गई।माथुर इससे पहले सिक्किम के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। अब उन्हें दक्षिण भारत के केरलम राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति उनके नए पद का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी।उनकी नियुक्ति से पाली और मारवाड़ क्षेत्र में खुशी का माहौल है। राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति और संवैधानिक पद तक पहुंचना उनके लंबे सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

पाली जिले के बेड़ल गांव में हुआ जन्म

ओम प्रकाश माथुर का जन्म 2 जनवरी 1952 को राजस्थान के पाली जिले के बेड़ल गांव में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन ग्रामीण परिवेश में बीता। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जयपुर का रुख किया।उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। बाद में उन्होंने अपना अधिकांश समय संगठन और सार्वजनिक जीवन को समर्पित किया।माथुर का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आगे बढ़ा। संगठन में काम करते हुए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी संगठनात्मक भूमिका ने उन्हें भाजपा में आगे बढ़ने का अवसर दिया।

RSS प्रचारक से भाजपा संगठन में अहम भूमिका तक

ओम प्रकाश माथुर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में काम किया। इस दौरान उन्हें संगठन के जमीनी स्तर पर काम करने का अनुभव मिला।बाद में वे भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कार्यों से जुड़े। पार्टी में उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय में उनकी भूमिका रही।राजस्थान की राजनीति में माथुर का नाम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहा है। उन्होंने पार्टी संगठन में कई वर्षों तक काम किया और राष्ट्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारियां निभाईं।

गुजरात भाजपा के संगठन में निभाई जिम्मेदारी

ओम प्रकाश माथुर ने गुजरात में भाजपा संगठन के लिए भी काम किया। उन्हें संगठन महामंत्री और प्रभारी जैसी जिम्मेदारियां मिलीं। इस दौरान पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय पर ध्यान दिया गया।गुजरात में उनके अनुभव ने राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान को मजबूत किया। संगठन में लंबे समय तक काम करने के कारण उन्हें चुनावी और राजनीतिक प्रबंधन का अनुभव भी मिला।हालांकि, उनके पूरे राजनीतिक सफर को समझने के लिए अलग-अलग समय पर निभाई गई जिम्मेदारियों और उनके कार्यकाल का संदर्भ देखना महत्वपूर्ण है।

राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद रहे

माथुर राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस भूमिका में उन्होंने राज्य में पार्टी संगठन से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी संभाली।वर्ष 2016 में वे राजस्थान से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने संसद के उच्च सदन में सांसद के रूप में कार्य किया। राज्यसभा में उनका कार्यकाल उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।संगठनात्मक अनुभव, पार्टी में लंबे समय तक सक्रियता और संसदीय भूमिका के चलते वे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।

जुलाई 2024 में बने थे सिक्किम के राज्यपाल

राष्ट्रपति भवन की 27 जुलाई 2024 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उन्होंने इसी नियुक्ति के बाद संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभाली। सिक्किम में अपने कार्यकाल के दौरान वे विभिन्न सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जून 2025 में उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के एक जत्थे को रवाना किया था।अक्टूबर 2025 में उन्होंने दिवाली के अवसर पर डोकाला क्षेत्र में तैनात भारतीय सेना के जवानों के साथ समय बिताया था। इन कार्यक्रमों के जरिए उनका कार्यकाल सार्वजनिक गतिविधियों और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों से जुड़ा रहा।

अब केरलम के राज्यपाल के रूप में संभालेंगे जिम्मेदारी

12 अक्टूबर 2026 को हुए राज्यपालों के फेरबदल में ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम से केरलम भेजा गया है। वहीं, केरलम के तत्कालीन राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। दुष्यंत गौतम को सिक्किम की जिम्मेदारी दी गई है। राज्यपाल का पद संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। इसमें राज्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के बीच निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार भूमिका निभाना शामिल है।माथुर के सामने अब केरलम में इसी संवैधानिक दायित्व को निभाने की जिम्मेदारी होगी। उनके अगले कार्यकाल और नई भूमिका से जुड़े कार्यक्रमों पर अब सबकी नजर रहेगी।

राजस्थान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?

पाली जिले के बेड़ल गांव से निकलकर भाजपा संगठन, राज्यसभा और राज्यपाल पद तक पहुंचना ओम प्रकाश माथुर के सार्वजनिक जीवन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।उनका राजनीतिक सफर राजस्थान की उस पीढ़ी के नेताओं से जुड़ा है, जिन्होंने संगठनात्मक काम से शुरुआत कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां निभाईं। केरलम में नई नियुक्ति के साथ उनके सार्वजनिक जीवन का एक और अध्याय शुरू हो रहा है।

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