जयपुर में खासा कोठी पुलिया हटाने की मांग तेज, जाम से परेशान लोगों ने दिए सुझाव
जयपुर में खासा कोठी पुलिया को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। एमआई रोड से कलक्ट्रेट सर्कल और पोलोविक्ट्री तक यातायात जाम की समस्या से नागरिक परेशान हैं। राजस्थान पत्रिका के अभियान से जुड़कर सैकड़ों लोगों ने पुलिया हटाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के सुझाव दिए हैं। कई लोगों ने चिंकारा कैंटीन से गवर्नमेंट हॉस्टल या कलक्ट्रेट सर्कल तक नई एलिवेटेड रोड बनाने की मांग की। वहीं, कुछ नागरिकों ने निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही है।
खासा कोठी पुलिया से रोजाना जाम की समस्या
जयपुर के व्यस्त इलाकों में शामिल खासा कोठी पुलिया को लेकर नागरिकों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि मौजूदा निर्माण के कारण यातायात सुचारु होने के बजाय परेशानी बढ़ रही है।एमआई रोड से कलक्ट्रेट सर्कल तक जाने वाले वाहन चालकों को अक्सर जाम का सामना करना पड़ता है। इसका असर पोलोविक्ट्री, बनीपार्क और स्टेशन रोड जैसे आसपास के क्षेत्रों पर भी पड़ता है।कई लोगों ने बताया कि जाम के कारण रोजाना अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलना पड़ता है। इससे कामकाज प्रभावित होता है और ईंधन की खपत भी बढ़ती है।
पुलिया हटाकर नई एलिवेटेड रोड बनाने का सुझाव
राजस्थान पत्रिका के अभियान के तहत नागरिकों ने पुलिया की उपयोगिता और यातायात व्यवस्था पर अपने सुझाव दिए। अधिकांश सुझावों में मौजूदा पुलिया हटाकर यातायात की जरूरत के अनुसार नया निर्माण करने की मांग सामने आई।जयपुर निवासी कुमार जयंत बाहेती ने कहा कि उन्हें रोजाना एमआई रोड की ओर कई बार जाना पड़ता है। उनके अनुसार, जाम से बचने के लिए करीब 30 मिनट अतिरिक्त लेकर निकलना पड़ता है।उन्होंने चिंकारा कैंटीन से कलक्ट्रेट सर्कल होते हुए गवर्नमेंट हॉस्टल तक एलिवेटेड रोड बनाने का सुझाव दिया। भूपेश माहुर और योगेश शर्मा ने भी मौजूदा निर्माण को हटाकर सही दिशा में नया फ्लाईओवर बनाने की मांग की।हालांकि, किसी भी नए निर्माण से पहले यातायात विशेषज्ञों की तकनीकी जांच और व्यवहार्यता का आकलन जरूरी होगा।
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
पुलिया को लेकर लोगों ने केवल यातायात सुधार की मांग नहीं की। कुछ नागरिकों ने निर्माण से जुड़े फैसलों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने का भी सुझाव दिया।जुगल किशोर अग्रवाल ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से रिकवरी की मांग की। सूरज थिरानी ने निर्माण को इंजीनियरों की अदूरदर्शिता से जोड़ा और सिविल लाइंस आरओबी का उदाहरण दिया।महेश ने सवाल उठाया कि यदि फ्लाईओवर गलत दिशा में बनाया गया था, तो निर्माण के दौरान इसे क्यों नहीं रोका गया। वहीं, मुकेश शर्मा ने दिल्ली में गलत फ्लाईओवर हटाए जाने का उदाहरण देते हुए जयपुर में भी ऐसा विकल्प अपनाने की बात कही।ये नागरिकों की ओर से उठाए गए सवाल और सुझाव हैं। निर्माण में किसी तरह की अनियमितता या जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और तकनीकी जांच जरूरी होगी।
पार्किंग और वैकल्पिक मार्ग के भी सुझाव
कुछ लोगों ने मौजूदा पुलिया का वैकल्पिक उपयोग करने की बात कही। शरद भुखमारिया ने सुझाव दिया कि पुलिया को पार्किंग के रूप में इस्तेमाल किया जाए और यातायात के लिए नया फ्लाईओवर बनाया जाए।राजवीर झाझड़िया ने कलक्ट्रेट सर्कल से जीपीओ की ओर नया फ्लाईओवर बनाने का सुझाव दिया। वहीं, लोकेंद्र खंडेलवाल ने जाम के कारण रोजाना करीब 40 मिनट बर्बाद होने की बात कही और जल्द समाधान की मांग की।इन सुझावों से स्पष्ट है कि नागरिक केवल मौजूदा समस्या का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए अलग-अलग विकल्प भी सामने रख रहे हैं।
जाम के साथ वायु प्रदूषण भी चिंता का विषय
खासा कोठी पुलिया के आसपास जाम की समस्या केवल समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक वाहनों के फंसे रहने से धुआं और वायु प्रदूषण भी चिंता बढ़ाते हैं।जयपुर के अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि जाम में फंसे लोगों को लंबे समय तक वाहनों से निकलने वाले धुएं के संपर्क में रहना पड़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए प्रदूषित हवा विशेष चिंता का विषय है।ऐसे में यातायात का सुचारु संचालन स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जाम कम करने के लिए बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और व्यावहारिक इंजीनियरिंग समाधान की जरूरत है।
अब प्रशासन के फैसले पर नजर
खासा कोठी पुलिया को लेकर नागरिकों के सुझावों ने यातायात व्यवस्था सुधारने की मांग को फिर चर्चा में ला दिया है। लोगों की प्रमुख मांग मौजूदा निर्माण की समीक्षा, जाम के कारणों की तकनीकी जांच और स्थायी समाधान तलाशने की है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग नागरिकों के सुझावों पर क्या कदम उठाते हैं। पुलिया को हटाने, नया फ्लाईओवर बनाने या यातायात व्यवस्था में बदलाव का निर्णय तकनीकी सर्वे, लागत, सुरक्षा और वैकल्पिक मार्गों के आकलन के आधार पर लिया जाना चाहिए।