PV सिंधु ने रचा इतिहास, पहली बार जीता जापान ओपन सुपर 750 का खिताब
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। उन्होंने जापान ओपन सुपर 750 के फाइनल में मेजबान खिलाड़ी और पूर्व विश्व चैंपियन आकाने यामागुची को सीधे गेमों में हराकर पहली बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का खिताब जीता। यह जीत न केवल उनके करियर का पहला सुपर 750 खिताब है, बल्कि लंबे समय बाद किसी बड़े BWF टूर्नामेंट में उनकी दमदार वापसी का भी संकेत है।
फाइनल में शानदार प्रदर्शन से जीता खिताब
रविवार को खेले गए जापान ओपन सुपर 750 के महिला एकल फाइनल में पीवी सिंधु ने जापान की आकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराया। करीब 50 मिनट तक चले मुकाबले में सिंधु ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और विपक्षी खिलाड़ी को वापसी का मौका नहीं दिया। दोनों गेमों में उन्होंने बेहतर रणनीति, तेज स्मैश और मजबूत डिफेंस का प्रदर्शन करते हुए मैच अपने नाम किया। इस जीत के साथ सिंधु पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं जिसने जापान ओपन सुपर 750 का खिताब अपने नाम किया।
चार साल बाद बड़ी ट्रॉफी जीतकर की दमदार वापसी
पीवी सिंधु के लिए यह जीत कई मायनों में खास है। वर्ष 2022 में सिंगापुर ओपन सुपर 500 जीतने के बाद वह किसी बड़े BWF खिताब तक नहीं पहुंच सकी थीं। इस दौरान उन्होंने कई बड़े टूर्नामेंट खेले, लेकिन खिताब जीतने से चूक गईं। जापान ओपन में मिली सफलता ने उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी है। लगातार मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने साबित कर दिया कि वह अब भी विश्व बैडमिंटन की सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल हैं।
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पूरे टूर्नामेंट में दिखाई बेहतरीन लय
जापान ओपन के दौरान सिंधु ने हर दौर में शानदार खेल का प्रदर्शन किया। शुरुआती मुकाबलों में उन्होंने चीन की हान युई को हराकर अगले दौर में जगह बनाई। क्वार्टर फाइनल में जापान की नोजोमी ओकुहारा चोट के कारण मुकाबला पूरा नहीं कर सकीं, जिससे सिंधु सेमीफाइनल में पहुंचीं। इसके बाद उन्होंने सेमीफाइनल में चीन की चेन यू फेई को मात देकर फाइनल का टिकट हासिल किया। पूरे टूर्नामेंट में सिंधु का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया और उन्होंने किसी भी बड़े दबाव को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया।
रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुई ऐतिहासिक उपलब्धि
इस जीत के साथ पीवी सिंधु ने अपने करियर का पहला BWF सुपर 750 खिताब जीतने का रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा उन्होंने चार साल बाद भारत के बाहर कोई बड़ा BWF खिताब भी अपने नाम किया। आकाने यामागुची के खिलाफ उनका रिकॉर्ड भी और मजबूत हो गया है। अब दोनों खिलाड़ियों के बीच खेले गए 30 मुकाबलों में सिंधु 16 मैच जीत चुकी हैं। यह आंकड़ा बताता है कि जापानी स्टार के खिलाफ भारतीय खिलाड़ी का प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है।
कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले बढ़ा आत्मविश्वास
जापान ओपन में मिली यह ऐतिहासिक जीत आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले भारतीय बैडमिंटन के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। लंबे समय बाद बड़ी ट्रॉफी जीतने से पीवी सिंधु का आत्मविश्वास निश्चित रूप से बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी लय को बरकरार रखती हैं तो आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी भारत के लिए पदक जीतने की प्रबल दावेदार होंगी। उनकी यह सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
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