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इंदौर ड्रग्स-सट्टा केस में जांच तेज, नाना पटवारी से फिर पूछताछ

इंदौर ड्रग्स-सट्टा केस में नाना पटवारी से फिर पूछताछ

इंदौर के चर्चित ड्रग्स, ऑनलाइन सट्टा और जमीन धोखाधड़ी मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में एक बार फिर नाना पटवारी से पूछताछ की गई है। वहीं, फरार आरोपी की तलाश में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ पहुंची पुलिस को सफलता नहीं मिली। दूसरी ओर, ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क और कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

जमीन के एग्रीमेंट को लेकर नाना पटवारी से पूछताछ

मामले की जांच कर रही पुलिस ने नाना पटवारी को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया। डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के अनुसार, जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण जमीन संबंधी एग्रीमेंट जब्त किया गया है, जिसे एक युवती ने पुलिस को सौंपा। यह दस्तावेज शुभम वैली कॉलोनी के एक प्लॉट से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह एग्रीमेंट किन परिस्थितियों में तैयार किया गया और इसमें संबंधित लोगों की क्या भूमिका रही। युवती का आरोप है कि रकम देने के बावजूद न तो उसे प्लॉट मिला और न ही पूरी राशि वापस की गई।

शुभम वैली के दस्तावेज खंगाल रही पुलिस

जांच एजेंसियों ने शुभम वैली कॉलोनी से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज तलब किए हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि कॉलोनी में प्लॉटों का आवंटन और बिक्री किस प्रक्रिया के तहत हुई तथा कहीं इसमें अनियमितता या धोखाधड़ी तो नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों का मिलान करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और मामले से जुड़े हर पहलू की पड़ताल की जा रही है।

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चित्तौड़गढ़ में आरोपी की तलाश, लेकिन हाथ लगी निराशा

ड्रग्स मामले में पहले ही तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसी सिलसिले में एक फरार आरोपी की तलाश के लिए इंदौर पुलिस की टीम राजस्थान के चित्तौड़गढ़ पहुंची थी। हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी वहां से फरार हो गया। इसके बाद टीम को बिना गिरफ्तारी के वापस लौटना पड़ा। पुलिस का कहना है कि आरोपी की संभावित लोकेशन के आधार पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

मोबाइल जांच में सामने आया ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क

मुख्य आरोपी संजय कौशल उर्फ रॉनी से पूछताछ के दौरान पुलिस को उसके मोबाइल फोन से ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर ऑनलाइन आईडी के जरिए सट्टा संचालित किया जाता था और लेनदेन डिजिटल माध्यम से होता था। इस मामले में संजय कौशल और प्रितेश त्रिपाठी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी अमित कौशल को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस मोबाइल डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रही है।

फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच से बढ़ीं मुश्किलें

जांच के दौरान कॉलोनाइजर सुमित मंत्री को दस्तावेजों के साथ थाने बुलाया गया था। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान उसे इस बात की जानकारी मिली कि उसके मेडिकल सर्टिफिकेट से जुड़े तथ्यों की भी जांच हो रही है, जिसके बाद वह वहां से चला गया। बाद की पूछताछ में यह दावा सामने आया कि जांच से बचने के लिए कथित रूप से फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

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