मॉनसून सत्र से पहले सियासी घमासान, प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। कुछ विपक्षी दलों ने सांकेतिक वॉकआउट किया, जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान से राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग दोहराते हुए सरकार को निशाने पर लिया।
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का सांकेतिक वॉकआउट
मॉनसून सत्र से पहले केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के कुछ दलों ने सांकेतिक रूप से बैठक से बहिर्गमन किया। विपक्षी नेताओं ने कथित तौर पर बागी सांसदों को अलग मान्यता देने और उन्हें अलग सीट आवंटित करने के मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, सूत्रों के अनुसार कुछ समय बाद सभी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने संसद सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया।
प्रमोद तिवारी ने सरकार पर साधा निशाना
राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने मीडिया से बातचीत में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने भगवान राम के नाम पर लोगों की आस्था और विश्वास को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लिखे गए संयुक्त पत्र का उनकी पार्टी समर्थन करती है। इस पत्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग की गई है।
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राम मंदिर ट्रस्ट की जांच की मांग दोहराई
प्रमोद तिवारी ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों पर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि यह मुद्दा केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिर निर्माण से जुड़े आर्थिक मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग समय पर अपना पक्ष भी रखा जाता रहा है।
शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और रोजगार के अवसरों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। इसके अलावा उन्होंने ईंधन में इथेनॉल मिश्रण की नीति को लेकर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि इस तरह के फैसलों को लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी जरूरी है।
20 जुलाई से शुरू होगा संसद का मॉनसून सत्र
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। परंपरा के अनुसार सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी देती है और सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील करती है। विपक्ष के विरोध और सरकार के एजेंडे के बीच इस बार का मॉनसून सत्र भी काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं।
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