नागौर में अवैध शराब कारोबार पर पुलिस का शिकंजा, आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
नागौर जिले में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे लगातार अभियानों ने एक बार फिर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालिया कार्रवाई में पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ दबिश देकर बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद की और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि जिस जिम्मेदारी के लिए आबकारी विभाग बनाया गया है, उस मोर्चे पर आखिर विभाग की सक्रियता क्यों दिखाई नहीं दे रही।
एक दिन में कई स्थानों पर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
नागौर पुलिस ने जिले में अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशाराम चौधरी के निर्देशन में गठित टीमों ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर दबिश दी। अभियान के दौरान आबकारी अधिनियम के तहत नौ मामले दर्ज किए गए और छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने विभिन्न जगहों से बड़ी मात्रा में देशी और अंग्रेजी शराब के साथ बीयर भी बरामद की। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध शराब की बिक्री और वितरण नेटवर्क को तोड़ने के उद्देश्य से की गई।
छह थाना क्षेत्रों में चला अभियान, भारी मात्रा में शराब जब्त
अभियान में डीएसटी टीम के साथ सदर, गोटन, जसनगर, खाटूबड़ी, जायल और सुरपालिया थाना पुलिस की संयुक्त टीमें शामिल रहीं। कार्रवाई के दौरान विभिन्न गांवों और कस्बों से सैकड़ों पव्वे देशी शराब, अंग्रेजी शराब तथा बीयर की बोतलें बरामद की गईं। पुलिस के अनुसार कई स्थानों पर अवैध रूप से शराब का भंडारण और बिक्री की जा रही थी। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और उनसे पूछताछ कर शराब आपूर्ति के स्रोतों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी बरामदगियां
यह पहली बार नहीं है जब नागौर पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई की हो। इससे पहले भी जिले में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान हजारों पव्वे शराब और बड़ी संख्या में बीयर की बोतलें बरामद की गई थीं। लगातार सामने आ रहे मामलों से संकेत मिलता है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से सक्रिय है। पुलिस का कहना है कि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
आबकारी विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
पुलिस की लगातार सफल कार्रवाइयों के बाद अब आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि अवैध शराब पर रोक लगाने की प्राथमिक जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है, लेकिन अधिकांश मामलों का खुलासा पुलिस कर रही है। आलोचकों का मानना है कि विभाग का ध्यान राजस्व संग्रह पर अधिक केंद्रित दिखाई देता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री को रोकने के लिए अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नजर नहीं आती। यही वजह है कि विभाग की सक्रियता पर बहस तेज हो गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब का नेटवर्क बना चुनौती
जिले के कई गांवों और कस्बों में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह कारोबार सामाजिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का कारण भी बन रहा है। कई बार शराब बिक्री को लेकर विवाद और झगड़े भी सामने आए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।