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पवन खेड़ा का पीएम मोदी पर निशाना, विदेश नीति और लोकतंत्र को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति, लोकतांत्रिक मूल्यों और इजरायल के साथ संबंधों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। तिरुवनंतपुरम में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कई राजनीतिक आरोप लगाए। वहीं, इन मुद्दों पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का रुख पहले से अलग रहा है।

लोकतंत्र और नेतन्याहू को लेकर दिया बयान

पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक आदर्श इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हैं और इसी वजह से उनकी कार्यशैली में लोकतांत्रिक मूल्यों की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यह उनका राजनीतिक आकलन है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी या केंद्र सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पेगासस विवाद का किया जिक्र

कांग्रेस नेता ने पेगासस स्पाइवेयर मामले को भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश अब भी यह जानना चाहता है कि कथित तौर पर पेगासस स्पाइवेयर भारत में कैसे आया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में पेगासस जासूसी विवाद सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर कई आरोप लगाए थे। हालांकि, केंद्र सरकार और भाजपा ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है और किसी भी अवैध निगरानी से इनकार किया है।

विदेश दौरों पर भी साधा निशाना

पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री के विदेश दौरों की आलोचना करते हुए कहा कि इन यात्राओं से देश को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी को उपहार स्वरूप ‘मेलोडी’ टॉफी देने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए सरकार पर तंज कसा और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर सवाल उठाए। यह टिप्पणी कांग्रेस की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा है।

विदेश नीति पर लगाए आरोप

खेड़ा ने भारत की विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की नीति संतुलित नहीं रही। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों में भारत के रुख पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना रहा है कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह स्वतंत्र, राष्ट्रीय हितों पर आधारित और रणनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर संचालित होती है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी बहस

पवन खेड़ा के इन बयानों के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस जहां सरकार की विदेश नीति और शासन शैली पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा पहले भी ऐसे आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार देती रही है। फिलहाल इन टिप्पणियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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