फरीदाबाद में डॉक्टरों का कमाल: दुर्लभ जन्मजात बीमारी से जूझ रही एक साल की बच्ची को मिली नई जिंदगी
हरियाणा के फरीदाबाद में डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक साल की बच्ची का जटिल और दुर्लभ जन्मजात बीमारी से सफल उपचार किया है। बच्ची के शरीर में पेशाब और मल त्याग के लिए केवल एक ही बाहरी मार्ग था, जबकि उसके दो गर्भाशय, दो योनियां और आंत से जुड़ी गंभीर जन्मजात विकृतियां भी मौजूद थीं। सफल सर्जरी के बाद अब बच्ची सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही है।
जन्म से ही थी गंभीर शारीरिक जटिलता
डॉक्टरों के अनुसार बच्ची “कॉमन क्लोआका” नामक दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित थी। इस स्थिति में मूत्र मार्ग, प्रजनन तंत्र और आंत अलग-अलग विकसित होने के बजाय एक ही रास्ते में मिल जाते हैं। यह बीमारी बेहद दुर्लभ मानी जाती है और लगभग 50 हजार नवजात बच्चियों में से किसी एक में देखने को मिलती है। इसी वजह से बच्ची को जन्म से ही कई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।
दो गर्भाशय और दो योनियों ने बढ़ाई चुनौती
मामले को और अधिक जटिल बनाने वाली बात यह थी कि बच्ची के शरीर में दो गर्भाशय और दो अलग-अलग योनियां मौजूद थीं। इसके अलावा वह टाइप-1 कंजेनिटल पाउच कोलन नामक दुर्लभ विकृति से भी प्रभावित थी, जिसमें सामान्य बड़ी आंत की जगह थैली जैसी असामान्य संरचना विकसित हो जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी जटिल स्थितियों का एक साथ पाया जाना अत्यंत दुर्लभ है।
विस्तृत जांच के बाद बनाई गई सर्जरी की योजना
बच्ची का जन्म होने के बाद उसकी जान बचाने के लिए पहले एक अन्य अस्पताल में आपातकालीन सर्जरी की गई थी। बाद में स्थायी उपचार के लिए उसे फरीदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां एमआरआई और उन्नत एंडोस्कोपिक जांचों के माध्यम से उसकी आंतरिक संरचना का गहन अध्ययन किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों ने विस्तृत सर्जिकल योजना तैयार की।
कई घंटे चली जटिल सर्जरी
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने बच्ची के लिए नया गुदा मार्ग तैयार किया और पेशाब के लिए अलग रास्ता बनाया। साथ ही प्रजनन तंत्र को सुरक्षित रखते हुए शरीर की विभिन्न प्रणालियों को अलग-अलग व्यवस्थित किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि यह ऑपरेशन अत्यंत चुनौतीपूर्ण था और इसके लिए विभिन्न विशेषज्ञों की टीम ने समन्वय के साथ काम किया।
डॉक्टरों ने बताया बेहद दुर्लभ मामला
सर्जरी से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि यह उनके करियर के सबसे जटिल मामलों में से एक था। उनका उद्देश्य केवल बच्ची की जान बचाना नहीं, बल्कि उसे भविष्य में बेहतर और सामान्य जीवन जीने का अवसर देना भी था। ऑपरेशन के दौरान लगातार निगरानी और विशेष सावधानी बरती गई ताकि किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा जा सके।
अब सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही बच्ची
सफल सर्जरी के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि आगे के उपचार और नियमित निगरानी के साथ वह सामान्य जीवन जी सकेगी। इस सफलता को चिकित्सा विज्ञान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और यह गंभीर जन्मजात विकृतियों से जूझ रहे अन्य मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण बन सकती है।