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तनोट में नया स्कूल बनेगा, विवाद के बाद सरकार ने दी जमीन; निर्माण कार्य शुरू

जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्र तनोट में स्कूल भवन ध्वस्त किए जाने के बाद उठे विवाद का समाधान निकल आया है। सरकार ने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पुराने स्कूल स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर नई भूमि आवंटित कर दी है। शिक्षा विभाग की ओर से नए विद्यालय भवन के निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए राहत जताई है।

स्कूल ध्वस्त होने के बाद उठा था विवाद

तनोट माता मंदिर के सामने स्थित विद्यालय भवन को हाल ही में प्रशासन ने कन्वेंशन सेंटर परियोजना के लिए हटाया था। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। ग्रामीणों का कहना था कि आसपास के लगभग 20 किलोमीटर क्षेत्र में यही एकमात्र स्कूल था, जहां बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। विद्यालय हटने के बाद बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

सरकार ने वैकल्पिक भूमि की आवंटित

विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग ने समाधान की दिशा में कदम उठाए। स्कूल के लिए नई जगह का चयन किया गया और पुराने विद्यालय स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर भूमि आवंटित कर दी गई। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य शुरू कराया गया है।

नए विद्यालय भवन का निर्माण शुरू

स्थानीय सरपंच इंद्र सिंह के अनुसार नए स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। प्रारंभिक चरण में 10 लाख रुपये की राशि जारी की गई है, जिससे निर्माण का पहला चरण पूरा किया जाएगा। आगे आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि भवन का निर्माण जल्द पूरा हो सके।

बच्चों की पढ़ाई पर नहीं पड़ेगा असर

स्थानीय लोगों का कहना है कि नए स्कूल के निर्माण से बच्चों की शिक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही नई इमारत तैयार होने के बाद छात्र-छात्राएं बेहतर सुविधाओं के साथ पढ़ाई कर सकेंगे। प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि शिक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

तनोट क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण फैसला

सीमावर्ती और दूरदराज क्षेत्र होने के कारण तनोट में शैक्षणिक सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में नए विद्यालय भवन का निर्माण स्थानीय बच्चों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनेगा और भविष्य में बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

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