बूंदी में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: BDO समेत 12 अधिकारी सस्पेंड, 7 दिन में मांगा 3 साल का हिसाब
राजस्थान के बूंदी जिले में पंचायती राज विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने विकास अधिकारी (BDO) सहित 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कदम उठाए हैं। पंचायतों में विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था और सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। इस फैसले से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
मंत्री के दौरे के बाद सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
मदन दिलावर ने 9 मई को बूंदी जिले के विभिन्न पंचायत क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने विकास कार्यों में गड़बड़ियों, सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति और सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायत की थी। निरीक्षण में कई स्थानों पर जाम नालियां, कचरे के ढेर और अधिकारियों की अनुपस्थिति सामने आई। पौधारोपण अभियान में भी बड़े पैमाने पर कागजी खानापूर्ति मिलने की बात सामने आई।
BDO सहित कई अधिकारियों पर गिरी गाज
जांच रिपोर्ट के आधार पर केशवरायपाटन के विकास अधिकारी को निलंबित कर उनका मुख्यालय जयपुर कर दिया गया है। वहीं तालेड़ा के विकास अधिकारी को एपीओ करते हुए पंचायती राज विभाग मुख्यालय भेजा गया है। इसके अलावा केशवरायपाटन, तालेड़ा और हिंडोली पंचायत समितियों के नोडल अतिरिक्त विकास अधिकारियों और सहायक अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
संविदाकर्मियों की सेवाएं समाप्त
स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े तालेड़ा, केशवरायपाटन और हिंडोली के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर्स की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। जिला स्तर के मिशन कोऑर्डिनेटर के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। साथ ही संबंधित पंचायत समितियों के सभी कनिष्ठ तकनीकी सहायकों (JTA) को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
कई ग्राम पंचायत प्रशासक हटाए गए
जमीतपुरा, सुवास, रडी, भीया और धोबड़ा ग्राम पंचायतों के प्रशासकों को पद से हटा दिया गया है। वहीं देलूंदा, सिंता, तीरथ, चडी, गुडली और लेसरदा पंचायतों के प्रशासकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके अलावा 11 ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) को भी निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
7 दिन में मांगा गया तीन साल का रिकॉर्ड
कार्रवाई के तहत संबंधित पंचायतों के अधिकारियों को पिछले तीन वर्षों में साफ-सफाई और वित्त आयोग के फंड से हुए खर्च का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने इसके लिए सात दिन की समयसीमा तय की है। अधिकारियों को खर्च की प्रत्येक राशि का हिसाब देना होगा।
जांच रिपोर्ट के बाद हुआ फैसला
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि वर्मा ने निरीक्षण के बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी थी। रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद 12 जून को यह बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया। माना जा रहा है कि किसी एक जिले में एक साथ इतने अधिकारियों और कर्मचारियों पर की गई यह प्रदेश की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक है।
जवाबदेही तय करने का संदेश
सरकार की इस कार्रवाई को पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय करने और विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विभाग का कहना है कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।