करौली स्कूल प्लास्टर हादसा: डीएम का बड़ा एक्शन, दो शिक्षा अधिकारियों को नोटिस
राजस्थान के करौली जिले में सरकारी स्कूल की छत का प्लास्टर गिरने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। मानसून के दौरान हुई इस घटना में लापरवाही बरतने के आरोप में जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी और अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक को 17 CCA नियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल हादसे पर प्रशासन सख्त, अधिकारियों से मांगा जवाब
करौली जिले के हिण्डौन उपखंड क्षेत्र के कौंडिया गांव स्थित राजकीय विद्यालय में प्लास्टर गिरने की घटना को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार गुप्ता और अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (समग्र शिक्षा अभियान) सुनील कुमार शर्मा को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर घटना और उससे जुड़ी लापरवाही पर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।
17 CCA नियम के तहत जारी किया गया नोटिस
जिला प्रशासन ने दोनों शिक्षा अधिकारियों को राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 17 CCA के तहत कारण बताओ नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि तीन दिनों के भीतर स्पष्ट और संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया जाए। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर नियमों के अनुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
जर्जर स्कूल भवनों पर कार्रवाई में देरी का आरोप
जिला कलेक्टर ने बताया कि मानसून से पहले जिले के सरकारी विद्यालयों में जर्जर और क्षतिग्रस्त भवनों का सर्वे कराया गया था। इसके बाद ऐसे भवनों और कक्षों को हटाने या ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई पूरी नहीं की गई। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है।
प्लास्टर गिरने से टला बड़ा हादसा
यह घटना हिण्डौन क्षेत्र के कौंडिया गांव स्थित सरकारी स्कूल में हुई थी। बीते शुक्रवार कक्षा की आरसीसी छत का निचला हिस्सा अचानक गिर गया था। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कक्षा में छात्र या शिक्षक मौजूद नहीं थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया। शिक्षा विभाग ने इस कमरे को पहले ही क्षतिग्रस्त घोषित कर रखा था। इसके बावजूद मरम्मत या आवश्यक कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हुए हैं।
ग्रामीणों ने जताई थी नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि जर्जर भवनों को लेकर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया।
मानसून में स्कूलों की सुरक्षा पर प्रशासन की नजर
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान सरकारी भवनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी जर्जर भवन के कारण कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। अब दोनों अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।