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जोधपुर वक्फ संपत्ति विवाद: कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई, चेयरमैन बोले- तथ्यों के आधार पर होगा फैसला

जोधपुर में कई सरकारी, शैक्षणिक और धार्मिक परिसरों को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किए जाने के विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में राजस्थान वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष खानू खान बुधवाली ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई जोधपुर जिला प्रशासन की तथ्यात्मक रिपोर्ट मिलने के बाद ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित भूमि वास्तव में वक्फ संपत्ति है या नहीं।

कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद ही होगा अगला फैसला

राजस्थान वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष खानू खान बुधवाली ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलात विभाग के प्रमुख सचिव और वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने जोधपुर कलेक्टर से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में संबंधित भूमि के स्वामित्व, रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा। बोर्ड का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन संपत्तियों पर वक्फ का वैध अधिकार है और किन मामलों में रिकॉर्ड में सुधार की आवश्यकता है। बोर्ड ने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा।

1965 के गजट का किया गया उल्लेख

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 1965 के सरकारी गजट में संबंधित भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था। उनके अनुसार उस समय प्रशासनिक सर्वे के आधार पर लगभग 129 बीघा भूमि को वक्फ संपत्ति माना गया था। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उम्मीद पोर्टल पर कुछ ऐसी संपत्तियां भी दर्ज हो गई हैं, जिनमें न्यायिक अधिकारियों के सरकारी आवास और कुछ धार्मिक स्थल शामिल हैं। इन प्रविष्टियों की सत्यता की जांच प्रशासनिक स्तर पर कराई जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।

हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला

जोधपुर की विवादित संपत्तियों को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है। विभिन्न पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, वक्फ मंत्रालय और जिला प्रशासन से जवाब मांगा है। अदालत में इस बात की भी जांच होगी कि संबंधित भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं। अब सभी पक्षों की निगाह प्रशासनिक रिपोर्ट और न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।

नगर निगम पर लगाए गंभीर आरोप

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने जोधपुर नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड में अनियमितता और कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड नगर निगम और वक्फ बोर्ड दोनों के पास उपलब्ध रहता है तथा सर्वे की प्रक्रिया भी प्रशासनिक स्तर पर होती है। यदि किसी स्तर पर रिकॉर्ड में हेरफेर या अनियमितता हुई है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

किन संपत्तियों को लेकर बना है विवाद?

विवाद उन संपत्तियों को लेकर है जिन्हें वक्फ बोर्ड के उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है। इनमें गीता भवन, शाह गोवर्धन कॉलेज, सोहनलाल मनिहार स्कूल, कुछ सरकारी आवास और अन्य परिसरों के नाम सामने आए हैं। साथ ही कुछ खसरा नंबरों को भी वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किए जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। प्रशासन अब राजस्व रिकॉर्ड, पुराने गजट और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की तैयारी में जुटा है।

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