जयपुर पुरोहित का कटला अग्निकांड: मौसी की 4 दुकानें जलीं, दिवाली का माल खाक; व्यापारी के छलके आंसू
जयपुर के परकोटे स्थित पुरोहित का कटला बाजार में लगी भीषण आग ने कई व्यापारियों की वर्षों की मेहनत को नुकसान पहुंचाया। आग की चपेट में करीब 20 दुकानें आने की जानकारी सामने आई है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में फायर नोजल तो लगाए गए थे, लेकिन पानी की लाइन और फायर प्लांट चालू नहीं था। आग के दौरान पानी की आपूर्ति बाधित होने से राहत कार्य भी प्रभावित हुआ। कई व्यापारी जान जोखिम में डालकर दुकानों से सामान निकालते रहे। अपनी मौसी की चार दुकानें जलने और दिवाली के लिए मंगाया गया नया माल खाक होने की बात बताते हुए व्यापारी विवेक अग्रवाल भावुक हो गए।
करीब 20 दुकानें आग की चपेट में
गुरुवार सुबह पुरोहित का कटला बाजार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।
तंग गलियों और बाजार में मौजूद सामान के कारण आग बुझाने में दमकलकर्मियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। व्यापारियों के अनुसार करीब 20 दुकानें प्रभावित हुई हैं।
आग के कारण बाजार में धुआं भर गया। कई लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायत हुई।
फायर नोजल लगे, लेकिन सिस्टम चालू नहीं होने का आरोप
व्यापारियों ने बाजार की अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दुकानों और परिसर में फायर नोजल लगाए गए थे।
हालांकि, व्यापारियों का दावा है कि पानी की लाइन और फायर प्लांट चालू स्थिति में नहीं थे। पुरोहित कटला व्यापार मंडल अध्यक्ष कमल किशोर पितलिया ने कहा कि फायर सिस्टम लगाने के बाद उसके संचालन और जांच को लेकर पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई।
उन्होंने दावा किया कि सिस्टम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे और अतिक्रमण हटाने तथा फायर सिस्टम चालू कराने के लिए प्रशासन को कई बार लिखा गया।
15 मिनट तक पानी की सप्लाई बाधित
आग बुझाने के दौरान सुबह करीब 9 बजे दमकल वाहनों में लगभग 15 मिनट तक पानी की आपूर्ति बाधित होने की जानकारी सामने आई।
व्यापारियों के अनुसार इस दौरान आग फिर तेज हो गई और राहत कार्य प्रभावित हुआ। आग के संपर्क में आने से पानी गर्म होने की भी बात सामने आई।
दमकलों की आवाजाही भी आसान नहीं थी। बाजार की तंग गलियों और अतिक्रमण के कारण राहत वाहनों को मौके तक पहुंचने में परेशानी हुई।
‘मौसी की चार दुकानें थीं, दिवाली का माल जल गया’
व्यापारी विवेक अग्रवाल आग से हुए नुकसान की जानकारी देते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि सेठी कॉम्प्लेक्स में उनकी मौसी सीमा की चार दुकानें थीं।
विवेक के मुताबिक, दुकानों में सीजन के हिसाब से थोक सामान रखा था। दीपावली को देखते हुए नया माल भी मंगाया गया था। आग में दुकानें और उनमें रखा सामान जल गया।
उन्होंने प्रशासन से बाजार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की।
दिलीप चंदवानी की आठों दुकानें प्रभावित
व्यापारी दिलीप चंदवानी ने बताया कि उनकी आठ दुकानों को गोदाम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। इनमें जूते-चप्पलों का स्टॉक रखा हुआ था।
उनके अनुसार सुबह करीब 8 बजे आग का पता चला। दमकल का पानी खत्म होने के बाद आग दोबारा भड़कने की बात उन्होंने बताई। इसके बाद आसपास की कई दुकानें भी आग की चपेट में आ गईं।
गार्ड ने ताला तोड़कर निकाली जान
बाजार में मौजूद गार्ड विक्रम ने बताया कि वह तीन सफाईकर्मियों के साथ अंदर था। आग और धुएं की स्थिति को देखते हुए उन्होंने ताला तोड़ा और शटर उठाकर बाहर निकलने का रास्ता बनाया।
व्यापारी रामचंद कटारिया ने भी फायर सिस्टम को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सिस्टम लगा हुआ है, लेकिन उसके चालू नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
पांच साल पहले भी आग से जली थीं दुकानें
कटला कर्मचारी राकेश खोज के अनुसार करीब पांच वर्ष पहले गुजरवाड़ा गली में भी आग लगी थी। उस घटना में दो दुकानें जल गई थीं, जबकि चार दुकानों में धुएं से सामान खराब हुआ था।
उनका कहना है कि पिछली घटना के बावजूद अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। हालांकि फायर सिस्टम के संचालन और उसकी वर्तमान स्थिति की आधिकारिक जांच अभी सामने आना बाकी है।
‘दिन में आग लगती तो बड़ा हादसा हो सकता था’
व्यापारी गोविंद ठारवानी ने कहा कि बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि बैठकों और चर्चाओं के बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि आग सुबह लगी, जबकि दिन में बाजार में भारी भीड़ रहती है। ऐसे में घटना के समय अधिक लोग मौजूद होते तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती थी।
व्यापारी दिनेश कुमार अग्रवाल ने भी कटला क्षेत्र में अतिक्रमण को दमकल की आवाजाही में बाधा बताया और नियमित सुरक्षा जांच की मांग की।
नगर निगम से फायर एनओसी की जांच की तैयारी
एडिशनल डीसीपी आलोक सिंघल के अनुसार प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट होने की आशंका है।
उन्होंने बताया कि छत पर रेस्तरां संचालन के लिए एनओसी ली गई थी या नहीं, इसकी जांच के लिए नगर निगम को पत्र लिखा जाएगा। इसके साथ ही फायर एनओसी और अग्निसुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जाएगी।
यानी आग के कारण और सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
आग के बाद व्यापारी खुद निकालते रहे पानी
आग पर काबू पाने के बाद भी व्यापारियों की परेशानी खत्म नहीं हुई। दुकानों में जमा पानी निकालने के लिए व्यापारी खुद जुटे रहे।
कई दुकानों में सामान पूरी तरह भीग गया, जबकि कुछ जगह आग और धुएं से नुकसान हुआ। व्यापारियों के सामने अब नुकसान का आकलन और कारोबार दोबारा शुरू करने की चुनौती है।
जौहरी बाजार और त्रिपोलिया बाजार की कई दुकानें भी घटना के बाद बंद रहीं। व्यापारियों ने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और बाजार में अतिक्रमण हटाने की मांग की है।