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जयपुर में गैस संकट गहराया: ब्लैक में महंगी गैस, मजदूरों का पलायन शुरू


जयपुर के औद्योगिक इलाकों में रसोई गैस की किल्लत ने हजारों प्रवासी मजदूरों की जिंदगी मुश्किल बना दी है। छोटे सिलेंडर की कमी और ब्लैक में महंगी गैस ने हालात ऐसे कर दिए हैं कि मजदूरों को भूखे सोना पड़ रहा है और अब वे शहर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। प्रशासन हरकत में आया है, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत अभी दूर नजर आ रही है।

कागजों में योजना, जमीनी हकीकत में संकट

सरकार की ओर से शुरू किया गया 5 किलो ‘छोटू सिलेंडर’ योजना का उद्देश्य गरीब और मजदूर वर्ग को सस्ती गैस उपलब्ध कराना था, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जयपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले मजदूरों को सरकारी दर पर गैस मिल ही नहीं रही। एजेंसियों पर सप्लाई की कमी है, जबकि रिकॉर्ड में वितरण दिखाया जा रहा है। इस अंतर ने गरीब वर्ग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ब्लैक में गैस खरीदने को मजबूर मजदूर

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि मजदूरों को खुले बाजार में 250 से 300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गैस खरीदनी पड़ रही है। जबकि सरकारी दर इससे काफी कम है। कम आय वाले मजदूरों के लिए यह खर्च असहनीय हो गया है। 7-8 हजार रुपये महीना कमाने वाला व्यक्ति अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ खाना बनाने के ईंधन पर खर्च कर रहा है। इससे परिवार का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है और दैनिक जीवन संकट में आ गया है।

चूल्हा जलाने पर भी पाबंदी, भूखे सोने की नौबत

जब मजदूर महंगी गैस नहीं खरीद पाते तो वे लकड़ी या अन्य साधनों से खाना बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन शहर में किराए के कमरों में रहने वाले इन मजदूरों को मकान मालिक धुआं होने के कारण चूल्हा जलाने से रोक देते हैं। ऐसे में कई मजदूरों को मजबूरी में बिना खाना खाए ही रात गुजारनी पड़ रही है। सरकारी योजनाओं की कमी और सुविधाओं के अभाव ने उनकी हालत और खराब कर दी है।

पलायन की ओर बढ़ते कदम

लगातार बढ़ती परेशानी के चलते अब मजदूर जयपुर छोड़कर अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी श्रमिकों के बीच यह रुझान तेजी से बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों मजदूरों के जाने से उद्योगों पर भी असर पड़ने की आशंका है। यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक संकट का रूप लेती जा रही है।

40 हजार मजदूरों पर संकट के बादल

विश्वकर्मा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 40 हजार से ज्यादा मजदूर रहते हैं, जिनमें अधिकांश की स्थिति बेहद कमजोर है। सर्वे में सामने आया है कि इन मजदूरों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है। सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि मजदूरों को राहत मिल सके और उनका पलायन रोका जा सके।

प्रशासन हरकत में, नए समाधान की तैयारी

मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं और सप्लाई व्यवस्था सुधारने की बात कही है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अब पेट्रोल पंपों के माध्यम से छोटे सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे मजदूरों को आसानी से और सही कीमत पर गैस मिल सके। साथ ही ब्लैक मार्केटिंग पर कार्रवाई करने की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि बिचौलियों पर लगाम लगाई जा सके।

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