जैसलमेर में 100 करोड़ की सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, 300 बीघा भूमि पर चला बुलडोजर
जैसलमेर में प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 300 बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। नगर विकास न्यास (यूआईटी) की अगुवाई में चलाए गए इस अभियान में 100 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि से 100 से अधिक अवैध निर्माण हटाए गए।
खुहड़ी-बाड़मेर लिंक रोड पर बड़ी कार्रवाई
गुरुवार सुबह यूआईटी सचिव सुखराम पिंडेल के नेतृत्व में अभियान शुरू किया गया। कार्रवाई के लिए चार जेसीबी, छह ट्रैक्टर और भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
प्रशासन ने खुहड़ी-बाड़मेर लिंक रोड पर स्थित सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई की।
100 से अधिक निर्माण किए ध्वस्त
अभियान के दौरान 100 से ज्यादा कच्चे मकान, झोपड़ियां और खाली पड़े पक्के निर्माणों को हटाया गया।
प्रशासन का कहना है कि इस भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जे किए जा रहे थे और भू-माफिया इसे छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर बेचने का प्रयास कर रहे थे।
भू-माफियाओं पर होगी कार्रवाई
यूआईटी सचिव सुखराम पिंडेल ने बताया कि अवैध कब्जों के पीछे सक्रिय लोगों की पहचान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जमीन पर अवैध प्लॉटिंग और बिक्री में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आवासीय कॉलोनी विकसित करने की योजना
प्रशासन के अनुसार अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि पर भविष्य में सुनियोजित आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी।
इस परियोजना का उद्देश्य शहर के विस्तार और आवासीय जरूरतों को पूरा करना बताया जा रहा है।
पक्के मकानों को दो दिन की मोहलत
कार्रवाई के दौरान उन मकानों को फिलहाल नहीं तोड़ा गया जिनमें लोग निवास कर रहे हैं।
प्रशासन ने ऐसे परिवारों को घर खाली करने और सामान हटाने के लिए दो दिन का समय दिया है। इसके बाद दूसरे चरण में शेष अतिक्रमण भी हटाया जाएगा।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
कार्रवाई के बाद कई प्रभावित परिवारों ने नाराजगी जताई। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और अचानक हुई कार्रवाई से वे बेघर हो गए।
वहीं प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई है।
पुलिस रही तैनात
संभावित विरोध को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कोतवाली थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अभियान पूरा किया गया।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।