ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सरकार सख्त: गगनयान मिशन के बीच बदली मंजूरी की प्रक्रिया
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के कई वैज्ञानिकों के इस्तीफों और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अब गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या वीआरएस पर अंतिम निर्णय सीधे अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) करेगा। सरकार का उद्देश्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों की गति और विशेषज्ञ मानव संसाधन को बनाए रखना है।
अब अंतरिक्ष विभाग करेगा अंतिम फैसला
रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरिक्ष विभाग ने ISRO के प्रमुख केंद्रों को निर्देश जारी किए हैं कि ग्रुप-ए वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या वीआरएस के आवेदन सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत मंजूर नहीं किए जाएं। ऐसे सभी मामलों को संबंधित केंद्र के निदेशक की सिफारिश के साथ अंतरिक्ष विभाग भेजा जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से गगनयान और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों पर लागू होगी।
कई प्रमुख केंद्रों को जारी हुए निर्देश
नई व्यवस्था के तहत यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर (URSC), विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC), ISTRAC और मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (MCF) सहित कई प्रमुख केंद्रों को निर्देश जारी किए गए हैं। इन संस्थानों के वैज्ञानिक देश के मानव अंतरिक्ष मिशन और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इस्तीफों की बढ़ती संख्या बनी चिंता का कारण
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के वर्षों में 100 से अधिक वैज्ञानिक और इंजीनियर ISRO छोड़ चुके हैं। इनमें कई अनुभवी अधिकारी निजी अंतरिक्ष कंपनियों से जुड़ गए हैं। वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोले जाने और 2023 की भारतीय अंतरिक्ष नीति लागू होने के बाद स्पेस स्टार्टअप्स में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़े हैं। इससे ISRO के अनुभवी वैज्ञानिकों के निजी क्षेत्र की ओर जाने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।
आगे हैं कई अहम अंतरिक्ष मिशन
ISRO के सामने आने वाले वर्षों में गगनयान, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और मंगलयान-2 जैसी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं हैं। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों की उपलब्धता इन मिशनों की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इस्तीफों की मंजूरी प्रक्रिया कड़ी करने से ही समस्या का समाधान नहीं होगा। वैज्ञानिकों को लंबे समय तक संगठन से जोड़कर रखने के लिए बेहतर करियर ग्रोथ, प्रतिस्पर्धी वेतन, आधुनिक अनुसंधान सुविधाएं और निजी क्षेत्र के समान अवसर उपलब्ध कराना भी आवश्यक होगा।