भिवाड़ी में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा, विदेशियों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर ऐंठे लाखों डॉलर
खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। आशियाना टाउन सोसायटी में छिपकर फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों के लोगों को सरकारी अधिकारी बनकर डराता था और फर्जी वारंट व डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर पैसे ऐंठता था। प्रारंभिक जांच में करीब 1 लाख डॉलर यानी लगभग 96 लाख रुपये की ठगी सामने आई है।
फ्लैट की दीवार तोड़कर बनाया था हाईटेक कॉल सेंटर
भिवाड़ी पुलिस के अनुसार, आरोपी एक निजी सोसायटी के फ्लैट में रहकर साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क संचालित कर रहे थे। आरोपियों ने फ्लैट की दीवारों में बदलाव कर वहां हाईटेक कॉल सेंटर जैसा सेटअप तैयार कर लिया था। यहां हाई-स्पीड इंटरनेट, लैपटॉप और अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से विदेशों में बैठे लोगों को निशाना बनाया जाता था। पुलिस ने मौके से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
विदेशी एजेंसियों के अधिकारी बनकर करते थे ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को अमेरिका के न्याय विभाग, बैंक या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद पीड़ितों को फर्जी कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी वारंट और बैंक खाते फ्रीज होने का डर दिखाया जाता था। इस तरह मानसिक दबाव बनाकर उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती थी।
VPN और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए छिपाते थे पहचान
साइबर ठग अपनी लोकेशन छिपाने के लिए VPN जैसी तकनीक का इस्तेमाल करते थे। ठगी से हासिल रकम को क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए भारत लाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और विदेशी संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, कई उपकरण बरामद
भिवाड़ी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली निवासी मोहित गुप्ता और राहुल सिंह के अलावा पश्चिम बंगाल निवासी जेम्स अनिल मंडल को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 7 लैपटॉप, 4 मोबाइल फोन और एक स्कॉर्पियो कार बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है।
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर था गिरोह का मुख्य आरोपी
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य आरोपी मोहित गुप्ता पहले एक निजी कंपनी में वेब डेवलपर के रूप में काम कर चुका है। तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर उसने साइबर ठगी का पूरा सिस्टम तैयार किया था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ठगी से पहले पीड़ितों से बातचीत की स्क्रिप्ट तैयार करते थे और अंग्रेजी में बातचीत का अभ्यास करते थे, ताकि वे खुद को विदेशी अधिकारी की तरह पेश कर सकें।
डेटा रिकवरी कर रही पुलिस, बढ़ सकती है आरोपियों की संख्या
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए लैपटॉप और मोबाइल से डेटा डिलीट करने की कोशिश की थी। हालांकि जांच टीम ने तकनीकी सहायता से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य रिकवर किए हैं। पुलिस अब बरामद डेटा के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस ने लोगों को किया सतर्क
भिवाड़ी पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक जानकारी, OTP, पासवर्ड या सिम से जुड़ी जानकारी साझा न करें। पुलिस ने कहा कि सरकारी अधिकारी या बैंक कर्मचारी कभी भी फोन पर डराकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव नहीं बनाते। संदिग्ध कॉल या साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।