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अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ा तनाव, ईरान ने कहा- सीजफायर अब प्रभावहीन

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अप्रैल में दोनों पक्षों के बीच लागू हुआ संघर्षविराम अब प्रभावी नहीं रह गया है। उन्होंने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि इस कार्रवाई के गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास के साथ बातचीत के दौरान ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी हमलों की निंदा की। उनका कहना था कि ये कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। अराघची ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और उसके संभावित परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिका पर होगी। ईरान का दावा है कि हालिया घटनाओं ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।

🇺🇸 अमेरिकी सेना ने कई ठिकानों पर कार्रवाई का दावा किया

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान की ओर से लगातार मिल रहे खतरों के जवाब में कई सैन्य ठिकानों, संचार प्रणालियों और एयर डिफेंस नेटवर्क को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया। वाशिंगटन ने दावा किया कि कार्रवाई पूरी तरह रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से की गई।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता

हमलों के बाद ईरान की सैन्य नेतृत्व संरचना की ओर से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा, ईरान समर्थित सैन्य गतिविधियों और अमेरिकी ठिकानों को लेकर क्षेत्र में नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी आशंकाएं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के खिलाफ आगे और कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं। उनके बयानों के बाद दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका और गहरी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कई देश क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहे हैं।

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