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रसोई पर महंगाई की मार, गैस सिलेंडर फिर महंगा, घरेलू बजट बिगड़ा

एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। जैसलमेर में घरेलू गैस सिलेंडर अब 935 रुपये से बढ़कर 964 रुपये का हो गया है। मार्च में हुई 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद जून में 29 रुपये और बढ़ने से तीन महीने में सिलेंडर 89 रुपये महंगा हो चुका है। बढ़ती महंगाई के बीच यह वृद्धि मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों के लिए नई चिंता बन गई है।

तीन महीने में 89 रुपये महंगा हुआ सिलेंडर

मार्च 2026 से पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 875 रुपये थी। मार्च में 60 रुपये और जून में 29 रुपये की वृद्धि के बाद इसकी कीमत 964 रुपये पहुंच गई है। यानी केवल तीन महीनों में सिलेंडर की कीमत में लगभग 10.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं वाणिज्यिक गैस सिलेंडर भी 3168 रुपये से बढ़कर 3179 रुपये का हो गया है।

सालभर में बढ़ेगा एक हजार रुपये से ज्यादा खर्च

गैस कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ रहा है। यदि कोई परिवार साल में 12 घरेलू सिलेंडर उपयोग करता है तो मार्च से पहले की तुलना में उसे करीब 1068 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। यह राशि कई परिवारों के लिए एक महीने की स्कूल फीस, बिजली बिल या घरेलू राशन खर्च के बराबर मानी जा रही है।

जैसलमेर में ज्यादा महसूस हो रहा असर

विशेषज्ञों के अनुसार जैसलमेर जैसे सीमावर्ती और दूरस्थ जिले में ईंधन की कीमत बढ़ने का असर अधिक पड़ता है। अधिकांश वस्तुएं दूसरे शहरों से यहां पहुंचती हैं। ऐसे में गैस और ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर बाजार में उपलब्ध अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई देता है। ऊर्जा क्षेत्र की महंगाई यहां दोहरे प्रभाव के रूप में महसूस की जाती है।

महंगाई की पूरी चेन पर असर

ऊर्जा क्षेत्र में कीमत बढ़ने से केवल गैस खर्च ही नहीं बढ़ता बल्कि इसका प्रभाव पूरे बाजार पर पड़ता है। एलपीजी महंगी होने से परिवहन लागत बढ़ती है, व्यापारिक खर्च बढ़ते हैं और अंततः उपभोक्ता वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं। इसका सीधा असर घरेलू बचत पर पड़ता है और परिवारों की आर्थिक योजनाएं प्रभावित होती हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे ये वर्ग

गैस कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय परिवारों, सीमित वेतन वाले कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों, किराएदार परिवारों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर पड़ रहा है। इन वर्गों की आय सीमित होने के कारण बढ़ती महंगाई का दबाव सीधे उनके मासिक बजट पर दिखाई दे रहा है।

परिवारों की बढ़ी चिंता

निजी कर्मचारी महेंद्र सिंह का कहना है कि वेतन लगभग स्थिर है, लेकिन रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। पेट्रोल, बिजली और अब गैस सिलेंडर महंगा होने से बचत करना मुश्किल होता जा रहा है। वहीं गृहिणी सीमा शर्मा का कहना है कि दूध, सब्जी, बिजली और बच्चों की पढ़ाई के बढ़ते खर्च के बीच गैस सिलेंडर महंगा होना परिवार के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र की कीमतें किसी भी अर्थव्यवस्था की मूल लागत तय करती हैं। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि का असर धीरे-धीरे सभी उत्पादों और सेवाओं पर दिखाई देता है। यदि आने वाले महीनों में ऊर्जा कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो खाद्य महंगाई और घरेलू खर्चों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है

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