गहलोत बनाम पायलट: ‘नकारा’ से ‘पुत्रतुल्य’ तक, 6 साल की सियासी जंग की पूरी कहानी
राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot और कांग्रेस नेता Sachin Pilot के बीच चला राजनीतिक संघर्ष पिछले छह वर्षों से लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी दोनों नेताओं के बीच ‘नकारा’, ‘निकम्मा’ और ‘गद्दार’ जैसे तीखे आरोप लगे, तो कभी एक-दूसरे को ‘पितातुल्य’ और ‘पुत्रतुल्य’ बताकर रिश्तों में नरमी का संदेश भी दिया गया। राजस्थान कांग्रेस की यह सियासी कहानी सत्ता, नेतृत्व और राजनीतिक उत्तराधिकार की लंबी लड़ाई के रूप में देखी जाती है।
2020 की बगावत से शुरू हुआ विवाद
जुलाई 2020 में राजस्थान कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हुआ, जब सचिन पायलट समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए और हरियाणा के मानेसर में डेरा डाल लिया। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें उपमुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष पद से हटा दिया। इसी दौरान अशोक गहलोत ने सार्वजनिक रूप से पायलट को ‘नकारा’ और ‘निकम्मा’ बताते हुए तीखा हमला बोला। जवाब में सचिन पायलट ने सीधे प्रतिक्रिया देने के बजाय केवल इतना कहा कि “सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।”
वापसी हुई, लेकिन दूरियां बनी रहीं
अगस्त 2020 में कांग्रेस हाईकमान की मध्यस्थता के बाद सचिन पायलट की पार्टी में वापसी हुई। हालांकि राजनीतिक मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए। पायलट ने तब साफ कहा था कि वह भाजपा में नहीं जा रहे हैं और कुछ लोग उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया।
‘गद्दार’ बयान ने बढ़ाई सियासी तल्खी
नवंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को ‘गद्दार’ बताते हुए कहा था कि जिसने पार्टी के खिलाफ विद्रोह किया, वह मुख्यमंत्री नहीं बन सकता। इस बयान ने राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया। इसके जवाब में सचिन पायलट ने कहा कि ऐसे शब्दों का प्रयोग उचित नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि गहलोत उनके लिए पितातुल्य हैं और वह उनकी बातों को व्यक्तिगत रूप से नहीं लेते।
25 सितंबर 2022 का राजनीतिक घटनाक्रम
सितंबर 2022 में उस समय नया विवाद खड़ा हुआ जब अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की संभावना के बीच सचिन पायलट का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में आया। इसके विरोध में गहलोत समर्थक विधायकों ने इस्तीफे की धमकी दी और राजनीतिक संकट गहरा गया। बाद में यह मामला कांग्रेस नेतृत्व के हस्तक्षेप से शांत हुआ। इस पूरे विवाद के दौरान सचिन पायलट ने सार्वजनिक रूप से कोई तीखी टिप्पणी नहीं की।
बदलते रिश्ते और सुलह के संकेत
समय के साथ दोनों नेताओं के रिश्तों में नरमी भी दिखाई दी। अप्रैल 2025 में दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की एक बैठक के दौरान दोनों नेता साथ नजर आए। कैमरों के सामने अशोक गहलोत ने मजाकिया अंदाज में कहा था, “फोटो ले लो, फिर कहोगे बनती नहीं है।” इस दौरान सचिन पायलट भी मुस्कुराते नजर आए।
2026 में गहलोत का नया बयान
अप्रैल 2026 में भाजपा नेताओं द्वारा सचिन पायलट को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में हैं और आगे भी कांग्रेस में ही रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पायलट पहले कुछ गलतियां कर चुके हैं, लेकिन अब वह समझदार हो गए हैं। हाल ही में गहलोत ने पायलट को अपने बेटे वैभव गहलोत की तरह ‘पुत्रतुल्य’ भी बताया, जिससे दोनों नेताओं के रिश्तों में आई नरमी की चर्चा तेज हो गई।
भाजपा ने भी साधा निशाना
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर भाजपा नेताओं ने भी टिप्पणी की। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष Madan Rathore ने कहा कि अशोक गहलोत केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बयान दे रहे हैं। उनका आरोप है कि कांग्रेस के भीतर बढ़ती अंतर्कलह के कारण उसके नेता लगातार राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं।
क्या खत्म हुई सियासी जंग?
हालांकि हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक सौहार्द देखने को मिला है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चला यह संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। बदलते बयानों और समीकरणों के बावजूद गहलोत और पायलट की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता राजस्थान की राजनीति का अहम अध्याय बनी हुई है।