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भारत के लिए क्यों अहम है मजबूत रूस? रक्षा विशेषज्ञ ने बताया ऊर्जा, सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन का पूरा गणित

वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी एक बार फिर चर्चा में है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और वैश्विक शक्ति संतुलन के लिहाज से एक मजबूत रूस भारत के हित में है। उनका कहना है कि दोनों देशों के दशकों पुराने रिश्ते आज भी भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण स्तंभों में शामिल हैं।

रूस को बताया भारत का भरोसेमंद साझेदार

रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) जेएस सोढ़ी ने एक इंटरव्यू में कहा कि सोवियत संघ के दौर से लेकर आज तक रूस भारत का विश्वसनीय सहयोगी रहा है। उनके अनुसार, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, रणनीतिक सहयोग और ऊर्जा क्षेत्र में रूस ने लगातार भारत का साथ दिया है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच विश्वास पर आधारित संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं।

ऊर्जा सुरक्षा में रूस की अहम भूमिका

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना किसी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनका कहना है कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बावजूद रूस भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। इससे भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आपूर्ति के विविध स्रोत बनाए रखने में मदद मिलती है।

बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन

रक्षा विशेषज्ञ का मानना है कि वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए बहुध्रुवीय व्यवस्था जरूरी है। उनके अनुसार, यदि विश्व में कई प्रभावशाली शक्तियां सक्रिय रहती हैं, तो किसी एक देश का अत्यधिक दबदबा सीमित होता है। उनका कहना है कि इस दृष्टि से एक मजबूत रूस वैश्विक रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत-रूस रक्षा सहयोग बना मजबूत आधार

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग कई दशकों पुराना है। दोनों देश रक्षा तकनीक, सैन्य उपकरण और रणनीतिक परियोजनाओं में लंबे समय से साझेदारी करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग भारत की रक्षा तैयारियों और दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

कमजोर रूस से बढ़ सकती है रणनीतिक अनिश्चितता

विशेषज्ञ के अनुसार, यदि रूस की वैश्विक भूमिका कमजोर होती है, तो अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में वैश्विक स्तर पर रणनीतिक अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिसका असर भारत समेत कई देशों की विदेश और सुरक्षा नीति पर पड़ सकता है।

भारत की नीति संतुलित कूटनीति पर आधारित

भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि उसकी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। नई दिल्ली विभिन्न वैश्विक साझेदारों के साथ संबंधों को संतुलित रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी संतुलित दृष्टिकोण के कारण भारत बदलते वैश्विक परिदृश्य में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत बनाए हुए है।

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