गुरुग्राम ट्रंप टावर्स में 'हाउस अरेस्ट' का सनसनीखेज आरोप, बिल्डर M3M पर लगाया गंभीर इल्जाम

मुख्य बातें
- गुरुग्राम ट्रंप टावर्स: बिल्डर M3M पर हाउस अरेस्ट का आरोप..
- गुरुग्राम के ट्रंप टावर्स में निवासी वरुण सुहाग ने M3M बिल्डर पर हाउस अरेस्ट का आरोप लगाया..
- लिफ्ट बंद करके परिवार को फंसाया गया। RERA केस के बाद लिया गया यह कदम चर्चा में..
02-11-2026 गुरुग्राम:
गुरुग्राम के सेक्टर-65 स्थित देश की सबसे प्रतिष्ठित लक्जरी सोसाइटी 'ट्रंप टावर्स' से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 36वीं मंजिल के अपार्टमेंट नंबर 36C के मालिक वरुण सुहाग ने बिल्डर M3M ग्रुप और उसके प्रमुख पंकज बंसल पर अपने ही घर में 'हाउस अरेस्ट' जैसी स्थिति पैदा करने का गंभीर आरोप लगाया है। सुहाग का दावा है कि बिल्डर मैनेजमेंट ने उनके फ्लैट तक आने-जाने, डिलीवरी और मेहमानों की एंट्री पर रोक लगा दी है, जिससे उनके बुजुर्ग माता और नवजात शिशु की सुरक्षा को खतरा है। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा का केंद्र बन गया है।
लिफ्ट डिसेबल कर बनाई गई असहाय स्थिति
वरुण सुहाग ने बताया कि 27 अगस्त 2026 को उन्हें अपार्टमेंट का पजेशन मिला था और 30 अक्टूबर को वे अपना सामान शिफ्ट कर रहे थे। इसके तुरंत बाद बिल्डर मैनेजमेंट ने दमनकारी रवैया अपनाना शुरू कर दिया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि 36वीं मंजिल की लिफ्ट का कॉल बटन जानबूझकर डिएक्टिवेट कर दिया गया है। परिणामस्वरूप, ऊपर या नीचे जाने के लिए उन्हें हर बार हेल्पडेस्क को फोन करना पड़ता है, जिसके बाद लिफ्ट आने में 30 से 40 मिनट लग जाते हैं। सुहाग के घर में हृदय रोगी उनकी मां और एक साल का बच्चा है, ऐसे किसी आपातकालीन स्थिति में इस देरी से उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है, जो मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
मेहमानों और डिलीवरी पर पूरी तरह प्रतिबंध
सुहाग ने आरोप लगाया है कि बिल्डर के स्टाफ ने उनके निजी जीवन में दखल देना शुरू कर दिया है। न केवल लिफ्ट, बल्कि परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए उनके घर आने वाले मेहमानों, डिलीवरी एजेंट्स, सर्विस स्टाफ और यहां तक कि उनकी निजी गाड़ियों और जरूरी सामान को भी गेट पर ही रोक दिया जाता है। इस प्रकार के व्यवहार ने उनके परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग (Isolate) कर दिया है। सुहाग ने एक्स (Twitter) पर बिल्डर मालिक पंकज बंसल को भेजे गए मैसेज का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है, जिसमें उन्होंने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
RERA केस और पुलिस की लापरवाही का आरोप
इस संघर्ष की जड़ में प्रोजेक्ट की देरी और हर्जाने का मुद्दा बताया जा रहा है। सुहाग का कहना है कि यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2024 में पूरा होना था, लेकिन भारी देरी के कारण उन्होंने RERA (Real Estate Regulatory Authority) में 'डिलीवरी में देरी के हर्जाने' के लिए केस दर्ज कराया हुआ है। संभवतः इसी कानूनी लड़ाई के बदले के तौर पर बिल्डर द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। सुहाग ने बताया कि उन्होंने गुरुग्राम पुलिस से भी शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने इसे 'अंदरूनी मामला' बताते हुए कार्रवाई करने से मना कर दिया, जिससे वे कानूनी मदद के बिना असहाय महसूस कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल: क्या यह बदला है?
वरुण सुहाग द्वारा सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा करने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया है। नेटिज़न्स और अन्य निवासियों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर देश का एक बड़ा और नामचीन बिल्डर क्यों अपनी साख दांव पर लगाकर एक ग्राहक के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है? क्या यह RERA केस का बदला है या प्रॉपर्टी मैनेजमेंट की कोई अन्य साजिश? इस घटना ने लक्जरी रियल एस्टेट सेक्टर में ग्राहक अधिकारों और बिल्डरों की जिम्मेदारी पर फिर से सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, M3M ग्रुप की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया के दबाव के बाद मामले में नया मोड़ आ सकता है।
पुलिस का पक्ष
इस संघर्ष की जड़ में प्रोजेक्ट की देरी और हर्जाने का मुद्दा बताया जा रहा है। सुहाग का कहना है कि यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2024 में पूरा होना था, लेकिन भारी देरी के कारण उन्होंने RERA (Real Estate Regulatory Authority) में 'डिलीवरी में देरी के हर्जाने' के लिए केस दर्ज कराया हुआ है। संभवतः इसी कानूनी लड़ाई के बदले के तौर पर बिल्डर द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। सुहाग ने बताया कि उन्होंने गुरुग्राम पुलिस से भी शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने इसे 'अंदरूनी मामला' बताते हुए कार्रवाई करने से मना कर दिया, जिससे वे कानूनी मदद के बिना असहाय महसूस कर रहे हैं।
इस खबर में कोई गलती दिखी? हमें बताएं





