Gold Price: एक हफ्ते में सोना ₹3,650 और चांदी ₹5,000 टूटी, अब आगे क्या होगा? जानिए एक्सपर्ट की राय
सोने और चांदी की कीमतों में इस हफ्ते भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जहां एक ओर सोना करीब ₹3,650 प्रति 10 ग्राम टूट गया है, वहीं चांदी में भी ₹5,000 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। मिडिल ईस्ट में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदों ने सोने की चाल को प्रभावित किया है। अब सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में सोना और चांदी फिर चढ़ेंगे या गिरावट जारी रहेगी?
सोने की कीमतों में भारी गिरावट के बाद तेज रिकवरी
दिल्ली में 24 कैरेट सोने का हाजिर भाव शनिवार को ₹1,49,230 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो शुक्रवार से ₹3,410 की तेजी दिखाता है। वहीं 22 कैरेट सोना ₹1,36,800 और 18 कैरेट ₹1,11,960 प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया। हालांकि पूरे हफ्ते के आंकड़ों पर नजर डालें तो 6 जून के मुकाबले सोना ₹3,650 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है। यानी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को लगातार अस्थिरता का सामना करना पड़ा है।
चांदी भी टूटी, निवेशकों में हलचल
चांदी की कीमतों में भी इस हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली में चांदी का भाव 6 जून को ₹2,65,000 प्रति किलोग्राम था, जो अब घटकर ₹2,60,000 प्रति किलोग्राम पर आ गया है। यानी एक हफ्ते में चांदी ₹5,000 प्रति किलो सस्ती हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और मांग में अस्थिरता इसका मुख्य कारण मानी जा रही है, जिससे निवेशकों की रणनीति पर असर पड़ा है।
कीमतों में उतार-चढ़ाव की बड़ी वजहें
इस हफ्ते सोने की चाल पर सबसे बड़ा असर मिडिल ईस्ट की भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों ने डाला है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से पहले सोना गिरा, लेकिन बाद में शांति वार्ता की उम्मीदों ने बाजार को संभाला। वहीं क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट से महंगाई की चिंता कम हुई, जिससे सोने पर दबाव बना। विशेषज्ञों के अनुसार, इन वैश्विक संकेतों ने ही बाजार को बार-बार ऊपर-नीचे किया है।
आगे क्या होगा सोने-चांदी का रुख?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने को सपोर्ट मिल सकता है। मिडिल ईस्ट में संभावित शांति समझौता, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीदें सोने के लिए सकारात्मक संकेत हैं। इसके अलावा भारत में वेडिंग सीजन की शुरुआत और अधिक मास के समाप्त होने के बाद मांग बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।